Karnataka Assembly Election सीएम बनने के लिए चाहिए इस पावरफुल फैक्टर का साथ

मिठाई भी बांटी

By: deepak deewan

Published: 16 May 2018, 10:44 AM IST

जबलपुर. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे हर किसी को चौंका रहे हैं। यहां कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो गई है वहीं भाजपा भी सत्ता से कुछ कदम दूर है। तीसरी पार्टी को भी पर्याप्त सीट नहीं मिली है पर वह सरकार बनाने के लिए बेकरार है। कर्नाटक के चुनाव परिणाम ऐसे आए हैं कि किसी एक दल की सरकार बनाना मुश्किल हो गया है। तीनों दलों के सरकार बनाने के अपने-अपने दावे हैं जिनका फैसला तो राज्यपाल लेंगे पर कर्नाटक में दलों की ऐसी स्थिति के लिए शहर के कुछ संगठनों ने अपनी पीठ थपथपानी शुरु कर दी है।

आरक्षण का मामला सबसे पावरफुल फैक्टर

इन संगठनों और उनके पदाधिकारियों का कहना है कि कर्नाटक की त्रिशंकु विधानसभा के लिए सबसे पावरफुल फैक्टर आरक्षण का मामला है। कर्नाटक चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय आरक्षण पीडि़त वर्ग मोर्चा ने यह दावा किया। इतना ही नहीं नतीजे आने के बाद मंगलवार को मोर्चा के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों ने मिठाई भी बांटी। मोर्चा सदस्यों के अनुसार कर्नाटक में बहुमत का समीकरण नोटा के कारण बिगड़ा है।

चार लाख मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया

आरक्षण की नीति के विरोध में चुनाव में करीब चार लाख मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया। मोर्चा के पदाधिकारियों ने मंगलवार को संजीवनी नगर स्थित कार्यालय में बैठक भी की। मौजूद आरक्षण व्यवस्था में सवर्णों के साथ अन्याय को लेकर राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री खुला पत्र लिखने का निर्णय किया। इस दौरान मोर्चा के अमित खम्परिया, आनंद मोहन पाठक, रूपकिशोर प्यासी, जागृति शुक्ला, अतुल जेसवानी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि कर्नाटक के चुनाव परिणाम ऐसे आए हैं कि किसी एक दल की सरकार बनाना मुश्किल हो गया है। भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस तीनों प्रमुख दल सरकार बनाने के लिए जरूरी ११२ विधायकों की संख्या से दूर हैं। सबसे बड़ी पार्टी भाजपा है जबकि कांग्रेस ओर जेडीएस मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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