ब्लैक बॉक्स  बताएगा एयरपोर्ट प्रबंधन का सच-झूठ

    ब्लैक बॉक्स  बताएगा एयरपोर्ट प्रबंधन का सच-झूठ

डीजीसीए दिल्ली में करेगी जांच, विमान से  सुअर टकराया या कोई और चूक, सामने आएगी सच्चाई


जबलपुर। यात्रियों की जान सांसत में डालने वाले हादसे को लेकर वन विभाग और एयरपोर्ट प्रबंधन आमने सामने हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि हादसा सुअर के सामने आने से हुआ है, वहीं वन विभाग ने कहा कि सुअर सामने आया तो उसका शव कहा गया। इस घटना का राज अब विमान का ब्लैक बॉक्स खोलेगा। डीजीसीए की दिल्ली से आई  टीम ने ब्लैक बॉक्स की जांच करने का निर्णय लिया है। जिसे दिल्ली में तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा खोला जाएगा।

दुर्घटना छिपाने में लगे अधिकारी
सूत्रों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों को छिपाने में एयरपोर्ट प्रबंधन के अधिकारी लगे हुए हैं। यही वजह है कि  प्रारम्भिक जांच में डीजीसीए अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। डीजीसीए की टीम ने एयरपोर्ट प्रबंधन के अधिकारियों, एटीसी एवं एयरलाइंस के पायलट से बातचीत की है। डीजीसीए को एयरपोर्ट प्रबंधन ने जहां जंगली जानवर होने की बात को सिरे से नकार दिया है, वहीं एयरलाइंस के पायलट ने दुर्घटना की वजह जंगल सुअर के रनवे में आने का कारण बताया है। वन विभाग की टीम को भी मौके पर जांच के लिए अंदर न जाने देने से भी मामला संदेह के घेरे में है।
black box open the truth-lie of airport management
यह है ब्लैक बॉक्स
ब्लैक बॉक्स इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। इसे डाटा रिकॉर्डर भी कहा जाता है। इसका रंगा काला नहीं, बल्कि लाल या गहरा नारंगी होता है। इसमें विमान की हर गतिविधि दर्ज होती है। एटीसी एवं क्रू सदस्यों के बीच बातचीत का अंतिम क्षणों का ब्योरा भी इसमें होता है। इन सूचनाओं के आधार पर ही विमान के क्रेश होने की स्थिति में दुर्घटना कारणों का पता लगाया जाता है। 1954 में पहली बार इसका इस्तेमाल किया गया।  सह सकता है अत्यधिक तापमान ब्लैक बॉक्स अत्यधिक तापमान को भी सह सकता है।  270 नाटस के आघात, वेग सहने की इसकी क्षमता है। यही वजह है कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भी इसको कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। उच्च दबाव और ताप के बीच भी इसमें दर्ज जानकारी सुरक्षित रहती है। इसे वायुयान के पिछले हिस्से में लगाया जाता है। इसकी मजबूत बॉडी टाइटेनियम या स्टील की होती है।  
इन बिंदुओं पर पड़ताल
 घटना के दिन मौसम की क्या स्थिति थी?  विमान लैंडिंग के दौरान अंडर शूट तो नहीं हुआ?
 रनवे की गलत दिशा से कहीं लैंडिंग तो नहीं की गई?
 लैंडिंग के दौरान  लो विजिबिलिटी की समस्या तो नहीं थी?  नाइट लैंडिंग सिस्टम वीक तो नहीं था?  एटीसी एवं पायलट के बीच कम्प्यूनिकेशन सिग्नल ने  काम किया कि नहीं?
प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध
जानकारों का कहना है कि इस मामले में एयरपोर्ट प्रबंधन एवं एयरलाइंस अधिकारियों  की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। डीजीसीए के अधिकारियों को भी वस्तुस्थिति छिपाने का प्रयास किया गया। अथॉरिटी के कर्मचारियों को एयरपोर्ट में व्याप्त अव्यस्थाओं के बारे में डीजीसीए की जांच के दौरान मुंह न खोलने को कहा गया था। वहीं सभी कर्मचारियों के मोबाइल भी बंद करा दिए गए हैं। डीजीसीए की टीम ने एयरपोर्ट के हिस्सों की फोटो एवं वीडियोग्राफी भी कराई गई है। कर्मचारियों के लिखित में बयान दर्ज कराए गए।

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