scriptcghs dispensary lady doctor misbehaves from older pensioner | सीजीएचएस डिस्पेंसरी में डॉक्टर मैडम की मनमानी, जमीन पर बैठो तो सुनती है बात | Patrika News

सीजीएचएस डिस्पेंसरी में डॉक्टर मैडम की मनमानी, जमीन पर बैठो तो सुनती है बात

सीजीएचएस डिस्पेंसरी में डॉक्टर मैडम की मनमानी, जमीन पर बैठो तो सुनती है बात

 

जबलपुर

Updated: April 21, 2022 10:02:00 am

जबलपुर। यादव कॉलोनी स्थित सीजीएचएस डिस्पेंसरी में हितग्राहियों को बेहद परेशान होना पड़ रहा है। यहां कई बार दवाइयों का अभाव रहता है। बुजुर्गों को सीढिय़ां चढऩा पड़ता है। चिकित्सक कक्ष में परामर्श के लिए बनी ङ्क्षवडो भी परेशानी का सबब है। इस डिस्पेंसरी से करीब 20 हजार बेनिफिसरी जुड़े हुए है।

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यादव कॉलोनी स्थित सीजीएचएस डिस्पेंसरी में अव्यवस्थाएं, परेशान होते हैं मरीज
डॉक्टर से बात करने के लिए बैठना पड़ता है जमीन पर, बुजुर्गों को परेशानी

परामर्श लेना बेहद कठिन
यहां ङ्क्षवडो नंबर एक में पदस्थ महिला चिकित्सक ने खुद की सुरक्षा के लिए ङ्क्षवडो को पूरी तरह से पैक करवा दिया है। इनसे परामर्श लेने के लिए मरीज को ङ्क्षवडो के छोटे से खुले भाग से ही बात करना पड़ता है, यहीं से पर्चा लेना और देना पड़ता है। इस छोटे खुले भाग में से अपनी परेशानी ठीक तरह से बताने में, परामर्श लेने में और पर्चा के आदान-प्रदान में बेहद परेशानी होती है। यहां इससे भी बड़ी परेशानी यह है कि यह खुला भाग जमीन से काफी कम ऊंचाई पर बना है। ऐसे में मरीजों को बहुत अधिक झुककर या लगभग नीचे बैठकर चिकित्सक से बात करना पड़ता है। यह बुजुर्ग मरीजों के लिए और भी अधिक तकलीफदेह है। जबकि इनमें से कोई सर्वाइकल तो को घुटनों या अर्थराइटस की बीमारी से पीडित होता है।

कैसे चढ़ें सीढिय़ां
यहां प्रथम तल पर बने 6 नंबर काउंटर पर पहुंचने के लिए सीढिय़ां चढऩा पड़ता है। लिफ्ट की व्यवस्था नहीं है। जबकि, यह व्यवस्था भू-तल में भी की जा सकती है।

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8.30 बजे तक आते हैं चिकित्सक
मरीजों का कहना है कि डिस्पेंसरी का समय सुबह 7.30 बजे है लेकिन कई चिकित्सक 8.30 बजे के बाद आते हैं। वहीं 2 बजने के पहले ही काउंटरों को बंद कर दिया जाता है। काउंटर को दोपहर 3 बजे तक संचालित किया जाना चाहिए। डिस्पेंसरी में केवल तीन चिकित्सक हैं। जबकि यहां चिकित्सकों के चार पद हैं।

घंटों लाइन में लगने की मजबूरी
यहां सुबह 7 बजे से पहुंचकर मरीज घंटों लाइन में लगे रहते हैं। रिटायर उम्र दराज चिकित्सक एक मरीज को देखने और पर्चा बनाने में 15 से 20 मिनट का समय लगाते हैं। ऐसे हालात में अधिकांश मरीजों का 2 बजे तक नम्बर नहीं आ पाता।

केस-एक
पीडि़त आनंद रैकवार ने कहा कि गत दिवस वे काम छोडकऱ सुबह 8 बजे से लाइन में लगे थे। 11 बजे सर्वर डाउन होने की बात पर चिकित्सकों ने नहीं देखा। दोबारा दूसरे दिन जाना पड़ा।

केस-दो
अजय गुप्ता कहते हैं कि एक बार में दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं। इलाज के लिए लाइन, दवाइयों के लिए लाइन लगानी पड़ती है। इसके बाद भी आधी दवाई मिलती है।

केस-तीन
राजेश कुमार ने बताया कि वे पीठ और घुटने के दर्द से झुकने में असमर्थ हैं। जब एक नंबर काउंटर को पूरा बंद करने पर विरोध जताया चिकित्सक नाराज थे।

पेंशनरों में नाराजगी
बीएसएनएल पेंशनर एसोसिएशन के जिला सचिव केएस जाट कहते हैं कि डिस्पेंसरी में अराजक माहौल है। चिकत्सक मर्जी से आते हैं। दवाइयां मांगने पर असभ्यता से बात की जाती है। इस सम्बंध में चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

यह समस्याएं
- आए दिन सर्वर डाउन रहना
- चार-चार घंटे लाइन में लगनेे की मजबूरी
- समय पर डॉक्टरों का न पहुंचना
- दवाइयों इंडेट रहना
- दो बजे के पहले काउंटर बंद हो जाना

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