आपकी सेहत को प्रभावित कर सकता है इन तीन बड़े ग्रहों का बदलाव, ये करें उपाय

शनि का अस्तांचल में प्रवेश, अगले दो दिन में अस्त हो जाएंगे बुध और शुक्र, 16 दिसंबर को बदलेगी सूर्य की राशि

By: Premshankar Tiwari

Published: 09 Dec 2017, 03:41 PM IST

जबलपुर। मौसम बार-बार रंग बदल रहा है। ठिठुरा देने वाली सर्दी के लिए मशहूर पूस की रातों से सर्दी वह मिजाज गायब है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो यह स्थिति ग्रहों में हो रहे भारी फेरबदल के कारण बन रही है। शनि ग्रह अस्तांचल में प्रवेश कर चुका है। 10 दिसंबर को बुध और 11 दिसंबर को शुक्र ग्रह अस्त होने जा रहे हैं। इसी माह सूर्य भी अपनी राशि बदलने वाले हैं। इसका असर पृथ्वी पर पड़ रहा है। इससे हर व्यक्ति की सेहत पर असर पड़ सकता है। पूस माह में कुछ उपायों को अपनाकर ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है।

और इधर ग्रहों का फेर
ज्योतिषाचार्य पं. जनार्दन शुक्ला के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में शनि और शुक्र प्रबल ग्रह माने गए हैं। इन ग्रहों के अस्त होने के कारण प्रकृति में बदलाव आ सकता है। जब भी ३-४ ग्रह एक साथ अस्त होते हैं तो मौसम में प्रतिकूलता संभावित रहती है। १० दिसम्बर रात ४ बजकर ५३ बजे बुध अस्तांचल में प्रवेश कर जाएगा। ११ दिसम्बर शाम ६ बजकर ४२ बजे शुक्र ग्रह अस्त हो रहा है। इसके पूर्व ५ दिसम्बर रात ८ बजकर १२ बजे शनि ग्रह अस्त हो गए हैं। इन ग्रहों के अस्तांचल में प्रवेश का असर ग्रह मंडल पर पड़ रहा है। वहीं १६ दिसम्बर दोपहर १२ बजकर ०४ बजे सूर्य भी राशि बदलकर धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं। सूर्य फिलहाल मंगल की वृश्चिक राशि में है। भूमि पुत्र मंगल की रशि को छोड़कर गुरू की राशि में सूर्य के प्रवेश से भी ग्रहमंडल में हलचल रहेगी। इसका सीधा असर पृथ्वी पर पड़ेगा। मौसम के कारण लोगों की सेहत प्रभावित हो सकती है।

सूर्य की उपासना है खास
ज्योतिषाचार्य पं. रामसंकोची गौतम के अनुसार सूर्य को ग्रहों का प्रमुख माना गया है। इस महीने १६ दिसंबर को सूर्य अपनी राशि बदलकर गुरू की धनु राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि पूस के महीने में भगवान सूर्य की उपासना को सबसे श्रेष्ठ माना गाया है। इस विशेष माह में सूर्य को अघ्र्य देने, लाल पुष्प से अर्चन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आचार्य डॉ. सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री ने बताया कि ब्रह्म पुराण, नारद पुराण, भविष्य पुराण, वाराह पुराण, मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण में पौष माह में सूर्योपासना का महत्व बताया गया है। एक माह तक प्रतिदिन भगवान सूर्य का अघ्र्य देना चाहिए। अघ्र्य जल में लाल रोली डालें और लाल पुष्प अर्पित करना उत्तम विधि है। इस माह में भगवान सूर्य के दिन रविवार का विशेष महत्व है। इस व्रत में सूर्य को अघ्र्य देकर सूर्यास्त से पहले प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। भगवान को सात मीठी पूड़ी का भोग लगाकर एक-एक पूड़ी गौ और कन्या को खिलाकर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

सप्त औषधि स्नान
ज्योतिर्विदों के अनुसार पौष माह में प्रतिदिन सप्त औषधि स्नान आरोग्यता प्रदान करता है। अगर, तगर, तालीस, नीम घेंटी, नीम छाल, गुरबेल, अकरकरा को पानी में उबाल कर अघ्र्य देना चाहिए और शेष जल को मिलाकर स्नान करना चाहिए। माना जाता है कि पौष माह में सूर्य की किरणें ज्यादा तेजस्वी होती हैं।

ये भी करें उपाय
ज्योतिषाचार्य पं. अखिलेश त्रिपाठी के अनुसार पौष के महीने में भगवान सूर्य को अघर््य देने के साथ गुरु की उपासना भी विशेष फलदायी है। गुरुवार के दिन भगवान को पीले पुष्प अर्पित करना चाहिए। केला या पीली वस्तुओं का दान शुभता प्रदान करता है। इसी तरह शनि की शांति के लिए पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाने के साथ धूप-दीप अर्पित करना चाहिए। यदि शनि से संबंधित पीड़ा है तो शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना लाभकारी होगा। सूर्य की उपासना के साथ ऊं ब्रां ब्रीं बूं्र बुधाय नम: के जाप से सूर्य के साथ बुध भी अच्छा फल देने लगते हैं।

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Premshankar Tiwari Desk
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