नर्मदा वैली की माटी का कमाल : यहां आम की उपज खास, मिठास भी कमा रही नाम

लंगड़ा, चौसा, दशहरी, मल्लिका जैसी देसी किस्मों से लेकर जापान के टेरेंगो बी टेमेगो जैसे आम का भी भरपूर उत्पादन

 

By: Lalit kostha

Published: 28 May 2021, 02:09 PM IST

प्रभाकर मिश्रा@जबलपुर। नर्मदा वैली की उपजाऊ जमीन में फलों के राजा आम का भरपूर उत्पादन हो रहा है। लंगड़ा, चोंसा, दशहरी, मल्लिका जैसी देसी किस्मों से लेकर जापान के टेरेंगो बी टेमेगो जैसी किस्मों के स्वादिष्ट आम की बगीचों में बहार आ गई है। यहां उपजे आम की स्थानीय स्तर पर तो मांग है ही, किसानों के पास मुम्बई, सूरत व अन्य शहरों से भी कॉल आ रहे हैं। कई किस्मों के आम की यहां से महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ की मंडियों में भी आपूर्ति भी हो रही है।

टेरेंगो बी टेमेगो की 21 हजार तक में मांग
चरगवां मार्ग पर डगडगा हिनौता में किसान संकल्प परिहार ने चोंसा, बादाम, हापुस, मल्लिका, लंगड़ा जैसी कई देसी किस्मों से लेकर 6 विदेशी किस्म के भी आम लगाए हैं। उनके दो बगीचों में 12 एकड़ में आम के साढ़े तीन हजार पेड़ लगे हैं। इनमें से जापानी किस्म के खूबसूरत व स्वादिष्ट टेरेंगो बी टेमेगो आम के एक फल को 51 सौ रुपए तक में मांगा जा चुका है। दुबई समेत साउदी अरब के कई शहरों में इस किस्म का आम 21 हजार रुपए तक में बिक चुका है। संकल्प ने डेढ़ साल देशभर में घूमकर आम की खेती पर अध्ययन किया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वर्ष 2013-14 में पौधरोपण की शुरुआत की थी। 2015 से पेड़ों में फल आना शुरू हो गया। खास बात ये है की संकल्प पेड़ में ही आम पकाते हैं। इसके कारण ये फल बाजार में मिलने वाले आम से ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं।

आम की इन किस्मों का जबलपुर में उत्पादन
अमृतांग, अलफैं जो, नीलेश्वरी, सोनपरी, बॉम्बे ग्रीन, नीलम, आम्रपाली, मल्लिका, लंगड़ा, चोंसा, दशहरी, फजली, सुंदरजा, तोतापरी, कलमी, हापुस और राजापुरी

चार सरकारी नर्सरी भी हैं
जिले में आम की चार सरकारी नर्सरी भी हैं। इनमें अधारताल, तेवर, खितौला सिहोरा व रजगवां कुं डम की नर्सरी शामिल हैं। इसके अलावा शहपुरा, न्यू भेड़ाघाट, लम्हेटाघाट तट, पाटन, पनागर, बरेला इलाकों में भी किसान आम की खेती कर रहे हैं। पहले जिले में देसी किस्म के आम की खेती होती थी, लेकिन पिछले कुछ साल में विदेशी किस्म के आम की खेती भी बढ़ी है।

नर्मदा वैली की उपजाऊ जमीन व अनुकूल जलवायु के कारण यहां आम की देसी से लेकर विदेशी किस्मों का वृहद स्तर पर उत्पादन हो रहा है। फल की खेती में किसानों को अच्छी सफलता मिलने के बाद और भी युवा किसान उनसे प्रेरित होकर आम की खेती करने आगे आ रहे हैं।
- एसके मिश्रा, उद्यानिकी विस्तार अधिकारी

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