4 दिनों की कठिन पूजा, नहाए खाए से शुरू हुआ प्राचीन छठ पर्व

  4 दिनों की कठिन पूजा, नहाए खाए से शुरू हुआ प्राचीन छठ पर्व
chhath puja

छठ पूजा बिहार के लोगों का मुख्य त्योहार है जिसकी वजह से इन दिनों बड़ी संख्या में बिहारी अपने घरों को भी लौटते हैं।

जबलपुर। भगवान सूर्य देव की उपासना का पर्व छठ पूजा नहाए खाए से शुरू हुआ। हिंदू धर्म के प्रमुख पांच देवताओं में से एक सूर्य देव की पूजा ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद सफलता व प्रसिद्धि के लिए की जाती है। छठ पूजा बिहार के लोगों का मुख्य त्योहार है जिसकी वजह से इन दिनों बड़ी संख्या में बिहारी अपने घरों को भी लौटते हैं। जिसकी वजह से रेलवे द्वारा इन दिनों स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती हैंं। इन दिनों परंपरागत फलों को छठ पूजन सामग्री की बिक्री बढ़ जाती है। 

घाटों पर भगवान सूर्य को अघ्र्य देने के लिए परंपरागत गीत भी गुनगुनाए जाएंगे। इसमेंं कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए..., होख न सुरुज देव सहइया बहंगी घाट पहुंचाए...हमहूं अरघिया देबई हे छठी मइया, केलवा के पात पर उगेलन सुरुजदेव...जैसे गीत उपस्थितजनों को आस्था और उल्लास से जोड़े रहेंगे। 


चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत शुक्रवार को नहाए खाए से शुरू हुआ। इसमें उत्सव को लेकर श्रद्धालु अपने को शुद्ध करते हैं। अगले दिन 5 अक्टूबर को खरना होगा। खरना में शाम के समय गुड़ में चावल मिलाकर उसका सेवन कर फिर उपवास रखेंगे। 6 नवंबर को नर्मदा नदी के घाट पर डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। चार दिवसीय महापर्व का समापन 7 नवंबर को उगते सूर्य को अघ्र्य देकर होगा। इसमें मौसमी फल भगवान सूर्य को अर्पित किए जाएंगे। महापर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को और समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी को होता है।

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