chitrakoot उपचुनाव: सीएम के चेहरे पर दिखा मलाल, कहा- करेंगे हार की समीक्षा, देखें वीडियो

सवालों से बचते नजर आए सीएम चौहान, कहा - वह कांग्रेस की परम्परागत सीट

By: deepak deewan

Updated: 12 Nov 2017, 03:42 PM IST

जबलपुर। मध्यप्रदेश की विकास यात्रा का कटनी पड़ाव कुछ फीका रहा। कार्यक्रम उत्सवपूर्ण जरूर रहा लेकिन दिग्गजों के चेहरों पर उदासी साफ दिखी। प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान भी इससे अछूते नहीं रहे। हार का मलाल उनके चेहरे पर भी नजर आया। वे पत्रकारों के सवालों से बचते नजर आए। सवाल पर सीएम ने केवल इतना कहा कि वह कांग्रेस की परम्परागत सीट थी। हार की समीक्षा की जाएगी।


लगायी थी पूरी ताकत
उल्लेखनीय है कि सियासी प्रतिष्ठा का विषय बनी चित्रकूट सीट पर सत्ताधारी दल भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा के प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी को १४ हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया। चुनाव को लेकर घमासान तो था ही, यह बेहद सुर्खियों में भी था। एक तरफ जहां कांग्रेस की परंपरागत सीट को बचाने में पूरी ताक लगा दी थी। वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस की इस परम्मपरागत सीट को हथियाने के लिए पुरजोर ताकत लगाई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित आधा दर्जन मंत्रियों ने यहां मोर्चा संभाला था। अंतत: निराशा ही भाजपाके हाथ लगी।

बस एक ही जवाब
चित्रकूट की सीट को प्रदेश में एक अलग नजरिये से देखा जा रहा था। भगवान श्री राम का सानिध्य प्राप्त इस पावन धाम में इस बार भगवा लहराने की उम्मीद की जा रही थी। भाजपा के दिग्गजों को भरोसा था कि लोग उन्हें खुलकर समर्थन देंगे। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। विश्लेषक इसे भाजपा सरकार द्वारा पिछले एक साल में उठाए गए नोटबंदी, जीएसटी जैसे कदमों से जोडक़र भी देख रहे हैं। हालांकि भाजपा के अधिकांश नेता यही कह रहे हैं कि चित्रकूृट भाजपा की परम्परागत सीट है। इसलिए इसके जाने का उतना अधिक क्षोभ नहीं है। वहीं कई दिग्गज इसकी समीक्षा में जुट गए हैं।


१४ हजार वोट से हारी भाजपा
चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव के लिए ९ नवंबर को वोटिंग हुई थी। इस उपचुनाव में ६५ फीसदी मतदान हुआ था। रविवार को मतगणना शुरु हुई तो प्रथम राउंड में भाजपा आगे थी लेकिन बाद में पिछड़ती चली गई और आखिरकार चुनाव हार गई। १९ राउंड की की मतगणना के बाद कांग्रेस उम्मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा के उम्मीदवार शंकरदयाल त्रिपाठी को १४ हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया। कांग्रेस विधायक प्रेमसिंह के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।

बीजेपी करेगी हार का रिव्यू
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान भी भाजपा की इस हार को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा है कि जनादेश का हम सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चित्रकूट विधानसभा में कांग्रेस लगातार जीतती रही है पर फिर भी कांग्रेस की इस परंपरागत सीट पर भाजपा की हार के कारणों की हम व्यापक समीक्षा करेंगे। गौरतलब है कि पिछले २७ सालों से भाजपा यहां केवल एक बार जीती है। इस दौरान यहां ६ बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से केवल एक चुनाव भाजपा जीत सकी है।

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