scriptCommission game in private schools, ruckus of discount | स्कूलों में कमीशन का खेल: दाम बढ़ाकर पकड़ा रहे छूट का झुनझुना, समझें पूरा गणित | Patrika News

स्कूलों में कमीशन का खेल: दाम बढ़ाकर पकड़ा रहे छूट का झुनझुना, समझें पूरा गणित

पूरी कवायद में स्कूल संचालक, बुक सेलर के साथ प्रकाशक भी शामिल

जबलपुर

Updated: April 07, 2022 09:54:43 am

जबलपुर/ किताब, यूनिफार्म के नाम पर शिक्षा माफिया तथाकथित नामी स्कूलों के जरिए कमीशनखोरी कर रह हैं। कमीशन का यह खेल यहीं तक सीमित नहीं है। कॉपियों के दामों में दो से तीन गुना वृद्धि कर अभिभावकों को छूट का ऑफर दिया जा रहा है।

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private schools
कॉपियों में भी कमीशन का खेल, 40 फीसदी वृद्धि कर छूट का झुनझुना

इस खेल में पुस्तक विक्रेता, कॉपी निर्माता और कुछ स्कूल संचालक भी शामिल हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अभिभावकों की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। खुद तैयार कराते हैं कॉपियां- शहर में बड़ी संख्या में कॉपी निर्माता हैं। इनमें कई बड़े संस्थान भी शामिल हैं। कई स्कूल संचालक इन निर्माताओं के माध्यम से मनमाने दाम अंकित कराते हैं। कुछ पुस्तक विक्रेता भी अपना नाम और मार्का अंकित करवाकर कॉपियों की कीमत और पेज तय करते हैं। कॉपियों को आकर्षक बनाने के लिए फ्रंट कवर को ग्लेज युक्त मोटा बनाया जाता है।

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घटिया कागज, पेज भी किए कम
कॉपियों में मुनाफाखोरी के लिए सी और डी ग्रेड के कागज का उपयोग किया जाता है। ऐसी कॉपियों के कागज की चमक कम और मोटाई भी काफी कम होती है। इतना ही नहीं 100 पेज की जगह 90 पेज, 196 पेज की जगह 190 पेज, 250 पेज की जगह 240 पेज कर दिए गए हैं।

ऐसे समझें छूट का गणित
एक साल पहले 196 पेज की कॉपी की कीमत 55 रुपए थी। अब इसे 40 प्रतिशत बढ़ाकर 76 रुपए कर दिया गया है। पुस्तक विक्रेता कॉपियों में 20-25 छूट देने का दावा कर रहे हैं। अभिभावकों को यह छूट आकर्षक नजर आती है।

अभिभावक बोले

कागज के दाम बढऩे की बात कहकर कॉपियों के मूल्य में वृद्धि की गई है। एक साल पहले जो कॉपी 30 रुपए में मिलती थी, अब 50 रुपए में मिल रही है। पेज भी कम कर दिए गए हैं।
मनजीत निगम, अभिभावक


कोविड काल के बाद स्कूल प्रबंधन राहत न देकर उगाही में जुट गए हैं। अभिभावकों को कहीं से राहत नहीं मिल रही है। शिक्षा को व्यापार में तब्दील कर दिया गया है।
जाग्रति साहू, अभिभावक


कॉपियों के कागज की गुणवत्ता ठीक नहीं है। एक पेज पर लिखने पर अक्षर दूसरी ओर उभर आते हैं। इसकी शिकायत दुकानदार से भी की, पर कुछ नहीं हुआ।
अनामिका गुप्ता, अभिभावक

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