आदिवासी वोटबैंक को साधने के चक्कर में BJP में ही बवंडर

-वनमंत्री ही नहीं BJP संगठन से जुड़़े कई लोगों में भी नाराजगी
- पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेंद्र राठौर ने धरना दे कर जताया विरोध

By: Ajay Chaturvedi

Published: 20 Sep 2021, 03:05 PM IST

जबलपुर. आदिवासी वोटबैंक साधने की रणनीति के तहत पिछले शनिवार को आयोजित आदिवासी राजा शहीद शंकर शाह और रघुनाथ शाह के 164वें बलिदान दिवस समारोह से कई BJP नेताओं को दूर करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा गर्म हो गया है। बीजेपी संगठन के कई नेता मुखर हो कर विरोध जताने लगे हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो भाजपा के दिग्गजों को इन रूठे नेताओं को मनाना मुश्किल भरा हो सकता है।

बता दें कि आयोजन के दिन ही प्रदेश सरकार में वनमंत्री विजय शाह नाराज हो गए थे। इसी तरह भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेंद्र राठौर तो बकायदा कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। कहा जा रहा है कि अभी कई ऐसे आदिवासी नेता हैं जिन्हें उस कार्यक्रम में जाने से रोक दिया गया था उनमें अंदर ही अंदर आक्रोश है। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि 2023 तो अभी दूर है लेकिन हाल में जो उपचुनाव होना है उस पर इन रूठे नेताओं का असर पड़ सकता है।

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सुरेंद्र राठौर ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि आदिवासी राजा शहीद शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस के कार्यक्रम के अलावा गृहमंत्री के सभी कार्यक्रमों में शहर और अन्य जिलों के वरिष्ठ नेताओं को नकारा गया। उन्होने कहा कि पार्टी में अब वरिष्ठों की उपेक्षा शुरू हो गई है। कहा कि गृहमंत्री के कार्यक्रम में पूर्व महापौर प्रभात साहू, विधायक बैसाखू लाल साहू, वनमंत्री कुंवर विजय शाह और केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को अपमानित किया गया है। यहां तक कि पार्टी के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन से पूर्व महापौर प्रभात साहू और विधायक बैसाखू लाल तक को अलग कर दिया गया। वहीं केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को मंच पर बुलाया तक नहीं गया।

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राठौर ने कहा कि 40 साल से पार्टी की सेवा कर रहा रहा हूं। दो बार युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, महामंत्री, युवा मोर्चा के प्रदेश कार्य समिति के सदस्य, जिला महामंत्री सहित जबलपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष रहा, लेकिन अब पार्टी ने किनारा कस लिया है।

सुरेंद्र राठौर

पार्टी के अंदर मची उथल-पुथल से प्रदेश संगठन में भी मंथन शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र राठौर के धरने की सूचना प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव तक पहुंचा। ऐसे में उन्होंने फौरन राठौर से फोन पर बात की और आश्वास्त किया कि उनकी पीड़ा पर जल्द सुनवाई होगी। वो पार्टी के सम्मानित और अनुशासित नेता हैं। अपनी बात पार्टी फोरम पर रखें, तब जा कर राठौर ने धरना समाप्त किया।

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