स्वस्थ्य आदमी को बता देते हैं मलेरिया का मरीज

निजी अस्पतालों में मलेरिया की जांच रिपोर्ट दी जा रही गलत, पैसे की लालच में जबरन करते हैं मलेरिया का इलाज

 जबलपुर. निजी अस्पतालों से क्रास चैकिंग के लिए भेजे गए मलेरिया के पचास फीसदी नमूने फेल हो गए हैं। ये वो नमूने थे, जिन्हें शासकीय विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया था। विक्टोरिया अस्पताल में जहां ये नमूने नेगेटिव आए, उधर तब तक निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को स्वाइन फ्लू, डेंगू जैसे लक्षण बताकर तमाम तरह के टेस्ट करवाकर खासी लुटाई कर डाली गई और मरीज की छुट्टी कर दी गई। जिला अस्पताल ने इन अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई नहीं की बल्कि उन्हें मात्र चेतावनी देकर छोड़ दिया।
 इलाज के नाम पर लूट
निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीज को ठगने का तगड़ा खेल चल रहा है। खेल एेसा है, जिसमें निजी अस्पताल में बुखार के मरीज के पहुंचते ही लुटाई शुरू हो जाती है। मरीज को डॉक्टरी सलाह पर  भर्ती किया जाता है और जांच के नाम पर ब्लड, यूरिन और स्टूल टेस्ट शुरू कर दिए जाते हैं। हर दिन टेस्ट लिए जाते हैं। मरीज को भारी बीमारी से बचने का विश्वास दिलाकर ये जांच की जाती हैं भले ही मरीज को सामान्य बीमारी हो। सत्ता और रसूख के बल पर चल रहे इन अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं होती। जिन मरीजों से इलाज के नाम पर ठगी की गई उन्हें न तो मुआवजा मिला और न ही बेतहर इलाज। मरीजों को जबरन ग्लूकोज और अन्य दवाएं देकर मनमानी की गई है। इलाज की आड़ में मरीजों की दुर्दशा पर शासन खामोश है।
 क्रास चैकिंग में सामने आई हकीकत
निजी अस्पतालों से जिला स्वास्थ्य विभाग मलेरिया की पॉजिटिव रिपोर्ट मंगवाता है। निजी अस्पतालों से आई स्लाइड की क्रास चैकिंग लैब में की जाती है, ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि मरीज को मलेरिया है या नहीं। निजी अस्पतालों से आ रही स्लाइड की जांच में करीब 50 फसदी मामले नेगेटिव निकले।
 सरकारी इलाज पर भरोसा नहीं
अच्छे इलाज की चाह में मरीज निजी अस्पताल पहुंचते हैं। जानकारों का कहना है कि मरीज हाथ से न निकल जाए इसलिए अस्पताल की ही लैब में फर्जी रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। मरीज को मलेरिया पॉजिटिव बताकर भर्ती कर लिया जाता है। भर्ती करके उससे इलाज के नाम पर मोटी कमाई की जाती है। मरीज का एंटीमलेरियल ट्रीटमेंट शुरू हो जाता है। यह इलाज सामान्य ग्लूकोज की बॉटल से शुरू होकर मंहगे इंजेक्शनों तक चलता है।

हमें जबरन छह दिन भर्ती रखा। शक होने पर हमने दूसरे डॉक्टर से जांच करवाई तो पता चला हमें मलेरिया नहीं है।
संजय सेन

दो दिन तो दवा दी लेकिन बाद में मुझे भर्ती कर लिया। जांच की गई तो मलेरिया नहीं निकला। तीन दिन  भर्ती रखा गया। लता साहू

बुखार आने पर दो जगह जांच करवाई। दोनों जगह अलग-अलग आई। आखिरकार  मेडिकल मेें दिखाया जहां दो गोली में तबीयत ठीक हो गई।
देवकरण मिश्र

निजी अस्पतालों से प्राप्त स्लाइडों में 50 फीसदी नमूने फेल हो गए हैं। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इस सम्बंध में शासन को पत्र भी लिखा गया था। जहां तक कार्रवाई की बात है तो निजी अस्पतालों को चेतावनी दी है।
डॉ बीएस चौहान,मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जबलपुर ऑनलाइन
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