Covid-19: भोपाल, इंदौर जैसी हो सकती है इस शहर की स्थिति, यह है वजह

कम संख्या में हो रही सैंपलिंग, फिर भी लगातार सामने आ रहे नए संक्रमित

By: reetesh pyasi

Published: 14 Jun 2020, 07:43 PM IST

जबलपुर। जिले में कोरोना संक्रमण के मामले थम नहीं रहे हैं। कम संख्या में सैम्पलिंग पर भी लगातार नए पॉजिटिव केस मिल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि भोपाल, इंदौर में प्रतिदिन औसतन एक हजार से ज्यादा नमूने की जांच कराई जा रही है। भोपाल में कुल नमूने के करीब 2.95 प्रतिशत सेम्पल जांच में पॉजिटिव मिल रहे हैं।

यह है केस मिलने की दर
फिलहाल कम संख्या में टेस्ट पर जिले में 3.48 की दर से पॉजिटिव केस आ रहे हैं। यदि भोपाल के बराबर संख्या में टेस्ट कराए जाएं तो पॉजिटिव केस की दर के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में नए संक्रमित मिलने की सम्भावना है। कोरोना पॉजिटिव की इंदौर में ज्यादा संख्या होने पर भी मृत्यु दर- 4.11 प्रतिशत के मामले में जिले से पीछे हैं। जिले में मृत्यु दर करीब 4.22 प्रतिशत है। जिले की आबादी के अनुसार प्रतिदिन औसतन एक हजार से ज्यादा टेस्ट की जरूरत है।

नई लैब के बाद भी लेट लतीफी से उठे सवाल
कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत में एनआइआरटीएच पर करीब 15 जिलों के नमूने की जांच का जिम्मा था। इसमें से कई जिलों के नमूने अब सागर, रीवा में नई लैब बनने के बाद आना बंद हो गए हैं। इससे एनआइआरटीएच में जांच का भार कम हो गया है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब में भी प्रतिदिन करीब तीन सौ तक नमूने जांचने का दावा है। अभी स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रतिदिन औसतन 150 से 180 नमूने ही जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज आने वाले कुछ संदिग्धों के नमूने की जांच भी वायरोलॉजी लैब में हो रही है। इसके बावजूद क्षमता से आधे नमूने होने पर भी जांच रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लग रहा है। वहीं, नमूने की संख्या बढ़ाने पर भी जोर नहीं है। केन्द्र की गाइडलाइन के अनुसार न्यूनतम संख्या में भी रोजाना नमूने की जांच नहीं होने से तीन माह से रोकथाम की कवायद सवालों के घेरे में है।

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reetesh pyasi Desk
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