Corona virus effect: देवी मंदिरों के लिए विख्यात है प्रदेश का यह शहर, इस बार नहीं पहुंच पा रहे भक्त

नवरात्रि पर होते हैं विशेष अनुष्ठान

जबलपुर। संस्कारधानी पहले से ही धार्मिक नगरी के रूप में भी जानी जाती रही है। देवी के मंदिरों के लिए तो यह विशेष रूप से विख्यात है। यहां अनेक दुर्गा मंदिर सिद्ध स्थान के रूप में जाने जाते हैं। इनमें तेवर का त्रिपुर सुंदरी देवी का मंदिर, सिविक सेंटर का माता बगुलामुखी मंदिर व बड़ी खेरमाई जैसे शक्तिपीठ शामिल हैं। इन सभी मंदिरों में आम दिनों में भी बड़ी संख्या में माता के भक्त दर्शन के लिए जुटते हैं। नवरात्र के दिनों में यहां हजारों भक्त माता की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। इस वर्ष कोरोना वायरस से बचाव के चलते परिस्थिति पृथक है।

व्याधि का नाश करती हैं मां बगलामुखी
सिविक सेंटर मढ़ाताल स्थित माता बगुलामुखी का मंदिर अपने आप में अनूठा है। आसपास कहीं भी माता बगुलामुखी का ऐसा सिद्ध स्थान नहीं है। इसलिए इस मंदिर भी भक्तों की खासी भीड़ जुटती है। दुश्मनों व व्याधियों का नाश करने के लिए माता बगुलामुखी की आराधना की जाती है। भेड़ाघाट का चौंसठ योगिनी मंदिर भी अपनी अनूठी मूर्तियों के लिए जाना जाता है।

बड़ी खेरमाई में 400 साल से पूजा
शहर के ऐसे ही अनूठे और सिद्ध मंदिरों में एक और मंदिर शुमार है जिसे बड़ी खेरमाई मंदिर के रूप में जाना जाता है। देवी का यह मंदिर सिद्धस्थान के रूप में प्रसिद्ध है। मंदिर में देवी के दर्शन करने और पूजा करने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। महाकौशल क्षेत्र के देवी भक्त देवी के दर्शन और पूजन के लिए हर साल कई बार इस मंदिर में आते हैं। इस मंदिर में स्थापित दुर्गा प्रतिमा अनूठी है। विशेष बात तो ये है कि यह तांत्रिक मठ है। आठ सौ वर्ष पूर्व के कल्चुरि क्षत्रिय राजाओं के शिलालेख के अनुसार बड़ी खेरमाई मंदिर गुप्त शक्तिपीठ के रूप में 52वीं शक्तिपीठ हैं। 400 वर्ष पूर्व शिलाखंड के अग्रभाग पर प्रतिमा स्थापित की गई, उनके वाम भाग भैरव एवं दाहिने भाग में हनुमानजी हैं। तभी से बड़ी खेरमाई के रूप में पूजित हैं। आदिवासी एवं वैदिक परम्परा से पूजा की जाती है।

reetesh pyasi Desk
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