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फसल बीमा से किसानों की दूरी, कम आए आवेदन

क्षतिपूर्ति राशि लेने में होती हैं दिक्कत, कठिन है प्रक्रिया

जबलपुर

Published: July 20, 2022 01:02:16 pm

जबलपुर@ज्ञानी रजक. किसानों को फसल का बीमा कराना तो आसान होता है, लेकिन क्षतिपूर्ति भुगतान में विलम्ब होने से किसान आगे नहीं आ रहे हैं। यही कारण है कि अब तक करीब तीन हजार किसानों ने ही फसलों का बीमा कराने के लिए आवेदन किया है। प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना के तहत सूखा, लम्बी शुष्क अवधि, कीट रोग, बाढ़, जलभराव, भू-स्खलन, ओलावृष्टि, प्राकृतिक अग्नि दुर्घटना, आकाशीय बिजली सहित अन्य आपदाओं में फसल को नुकसान होने पर बीमा राशि दी जाती है। इसके लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर ऋणमान से डेढ़ से दो प्रतिशत प्रीमियम देना होता है।

Pradhan Mantri Bima Fasal Yojna
. किसानों को फसल का बीमा कराना तो आसान होता है, लेकिन क्षतिपूर्ति भुगतान में विलम्ब होने से किसान आगे नहीं आ रहे हैं।

खरीफ सीजन में 22 हजार किसानों ने कराया था बीमा पिछले खरीफ सीजन में करीब 22 हजार किसानों ने 9 करोड़ रुपए का बीमा कराया था। खरीफ और रबी की फसलों में 11 हजार 78 किसानों को ही लाभ मिला था। यह मुआवजा वर्ष 2019-20 का था। 72 घंटे में देनी होती है सूचना किसानों को बीमा की शर्तों में शामिल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देना होता है। लेकिन, यह कई बार सम्भव नहीं होता। कभी पटवारी के नहीं मिलने तो कभी कृषि विभाग या बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि नहीं मिलने से यह विलम्ब होता है।

ऐसे होता है निर्धारण

बीमा के लिए फसल लागत और क्षतिपूर्ति के लिए अलग-अलग नियम हैं। बीमा से जुड़े जानकारों ने बताया कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक फसल लागत तय करता है। फसल कटाई के प्रयोग से क्षति का अनुमान लगाकर किसानों को बीमा राशि दी जाती है। पटवारी हल्का स्तर पर फसल की कटाई का प्रयोग चार बार होता है। दो बार ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और दो बार पटवारी करते हैं। फसल कटाई प्रयोगों पर आधारित वास्तविक उपज बीमा कम्पनी को कृषि निदेशालय उपलब्ध कराता है।

फैक्ट फाइल

2.80 लाख हेक्टेयर में जिले में होती है खेती

- 02 लाख से ज्यादा किसान जिले में

- 75 फीसदी रकबा में होती है गेहूं, धान की खेती

- 52 हजार हेक्टेयर से ज्यादा होती है सब्जी की खेती

- 07 हजार हेक्टेयर से में होती है फलों की खेती

फसल बीमा से किसानों की दूरी, कम आए आवेदन

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। उन्हें इसके फायदे भी बताए जा रहे हैं। मुआवजे की प्रक्रिया कठिन नहीं है। सरलता से क्षतिपूर्ति राशि मिल जाती है।

-प्रियंक खरे, जिला समन्वयक, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड

फसल बीमा को लेकर किसानों में ज्यादा उत्सुकता नहीं होती, क्योंकि सरकार किसान, फसल और खेत को इकाई नहीं मानती। मुआवजे के लिए पटवारी हल्का में हुए नुकसान को आधार बनाया जाता है। यदि हल्का में नुकसान नहीं हुआ और एक किसान को क्षति हुई तो इसमें उसकी क्या गलती है।

-केके अग्रवाल, अध्यक्ष, भारत कृषक समाज

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