शहर की इस बेटी ने किया ऐसा काम कि सभी कर रहे सेल्यूट

चेहरे पर चमकी वर्दी की चमक, लेफ्टिनेंट बनीं प्रिया

By: deepak deewan

Published: 13 Mar 2018, 11:25 AM IST

जबलपुर . अपने आर्मीमैन पिता के साथ वे जब भी ५०६ आर्मी बेस वर्कशॉप जातीं, वहां कई आर्मी लेडी ऑफिसर को देखतीं। इन लेडी ऑफिसर को देखकर वे भी मन ही मन आर्मी ऑफिसर बनने का सपना संजो बैठीं और उनका यह ख्वाब पूरा हो भी गया। कठिन परिश्रम और टफ ट्रेनिंग से गुजरने के बाद शहर की बेटी प्रिया कश्यप लेफ्टिनेंट बनकर शहर लौटीं। तकरीबन ११ माह की ट्रेनिंग चेन्नई में लेने के बाद अपने शहर पहुंची, जहां उनके परिवारवालों और मित्रों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। तीन बार एसएसबी (सर्विस सलेक्शन बोर्ड) देने के बाद प्रिया को यह सफलता हाथ लगी है।


लेडी आर्मी ऑफिसर को देख तय किया लक्ष्य
प्रिया ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्होंने आर्मी ऑफिसर बनना है। पिता यशपाल कश्यप ५०६ आर्मी बेस वर्कशॉप में सिविल स्टाफ हैं। कई बार वहां जाना हुआ और वहां प्रिया ने कई आर्मी लेडी ऑफिसर को देखा। बस वहीं से प्रिया ने भी सोच लिया कि आगे की मंजिल भले ही कठिन हो, लेकिन वह आर्मी ऑफिसर बनकर ही दम लेंगी। बस फिर क्या था, उन्होंने अपना जीके स्ट्रॉन्ग किया और तैयारी में जुट गईं।


तीसरे प्रयास में मिली सफलता
प्रिया ने जीईसी से पढ़ाई के बाद एसएसबी की तैयारी की। पहले अटैम्प्ट में वे कॉन्फ्रेंस में आउट हुईं, दूसरे अटैम्प्ट में वे मेरिट से आउट हो गई थीं। दो विफलताओं के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरी बार में उन्होंने एसएसबी के हर पड़ाव पार किए और मेरिट में स्थान मिल गया।


लाइफ तो बस यही है, बाकी कुछ नहीं
प्रिया ने बताया कि अक्सर विफलता व्यक्ति को तोड़ देती है और राह बदलने में मजबूर कर देती हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। एसएसबी के दौरान उन्होंने यह अनुभव किया कि असल जिंदगी तो यही है। वे इसे पाकर ही रहेंगी और आखिर में सफलता मिल ही गई। प्रिया का कहना है कि इस सफलता के असली हकदार उनके पिता यशपाल हैं।

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