mineral water की बोतल में मिले घातक बैक्टीरिया, कटेंट भी कम

प्रयोगशाला की जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच, कलाकंद में भी पायी गई मिलावट

By: Premshankar Tiwari

Published: 12 Nov 2017, 09:30 PM IST

जबलपुर। आंख बंद करके मिनरल वॉटर पी रहे हैं तो सावधान हो जाएं। इसका पानी आपकी सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकता है। इसका खुलासा एक मिनरल वॉटर कंपनी के पानी की जांच में हुआ है। मिनरल वॉटर कंपनी के पानी की बोतल में घातक बैक्टीरिया पाए गए हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक निर्धारण अधिनियम 2006 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।

लिए गए थे सेंपल
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरीश दुबे के अनुसार पिछले माह रिछाई में संचालित केपी बेबरीज की जांच की गई थी। जांच के दौरान फैक्ट्री संचालन का लाइसेंस नहीं मिला था। नियमानुसार बिना लाइसेंस के यह कारोबार नहीं किया जा सकता है। जांच के बाद फैक्ट्री को सीज करने की कार्रवाई की गई थी व मिनरल वॉटर के नमूने जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच के दौरान बोतल बंद मिनरल वॉटर में बैक्टिरिया पाए गए। डीआईएफ कंटेंट जो दर्शाए गए थे वह भी नहीं मिले। इस आधार पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

परखकर करें उपयोग
खाद्य सुरक्षा अधिकारी दुबे का कहना है ऊंचे दामों पर पानी बेचकर फायदा कमाने वालों की फेहरिस्त लगातार बढ़ रही है। मिनरल वॉटर के निर्माण में कई कंपनियां उतर आई हैं। हर व्यक्ति को इनके बेधड़क उपयोग में सावधानी बरतना चाहिए। विश्वनीय व सर्टिफाइड कंपनी का ही पानी पीना चाहिए। ज्यादा अच्छा तो यह है कि सादे पानी का उपयोग किया जाए। बोतल के उपयोग से पहले यह जांच लेना चाहिए कि पानी ठीक या नहीं। जागरुक उपभोक्ताओं को इनमें लिखे कंटेंट की भी जांच करानी चाहिए।

सेहत के लिए घातक
चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. केसी देवानी का कहना है कि पानी शरीर पर तुरंत असर करता है। इसलिए इसके उपयोग में विशेष सावधानी आवश्यक है। बैक्टीरियायुक्त या फिर अन्य तरह का अमानक पानी पेट में इन्फैक्शन बढ़ा सकता है। इससे उदर विकार समेत डायरिया और लिवर व गुर्दे की बीमारी भी हो सकती है। सामान्य तौर पर भी पानी का छानकर या विधिवत उपचार के बाद ही उपयोग किया जाना चाहिए। प्रो. अरुण शुक्ल का कहना है कि पानी का मसला सीधे तौर पर आदमी के स्वास्थ्य से जुड़ा है। सरकार को चाहिए कि वह मिनरल वॉटर बनाने वाली कम्पनियों की विधिवत जांच करे। स्टॉलों से सीधे सैम्पलिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि गड़बड़ी करने वाले बेनकाब हों और लोगों को दाम चुकाने पर शुद्ध पानी प्राप्त हो।

कलाकंद में भी मिलावट
विभाग द्वारा घमापुर दुर्गा स्वीट्स से कलाकंद के नमूने लिए गए थे। कलाकंद में खोवे व शक्कर का मिश्रण रहता है। इसमें आयल नहीं मिलाया जाता। जांच के दौरान कलाकंद में अदर फैट पाया गया, जो कि वनस्पति घी व तेल का मिश्रण था। दोनों ही प्रकरणों में विभाग द्वारा जांच करके प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की गई।

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Premshankar Tiwari Desk
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