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कम होते मैदानी कर्मचारी, तेजी से बढ़ता लाइन लॉस, महंगी होती बिजली

तारों के मकडज़ाल-बिजली चोरी पर नहीं लग रही रोक, सुधार कार्य कराना टेढ़ी खीर

जबलपुर

Published: December 18, 2021 06:31:13 pm

श्याम बिहारी सिंह @ जबलपुर। बिजली की दरें लगातार बढ़ रही हैं। इसके बाद भी सभी शहरी उपभोक्ताओं को सुलभ बिजली आपूर्ति नहीं हो रही। शहर में ही तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां आए दिन बिजली लाइन में फॉल्ट आता है। फॉल्ट आना तो ठीक, मुश्किल यह है कि फॉल्ट सुधरवाने के लिए परेशान होना पड़ता है। इससे भी ज्यादा ङ्क्षचता का विषय यह है कि प्रदेश, जिले और शहर में लाइन लॉस तेजी से बढ़ा है। इन सबके पीछे बड़ा कारण यह भी है कि बिजली कंपनी में मैदानी अमले की भारी कमी है। दावा किया जाता है कि जबलपुर शहर में बिजली आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए करोड़ों रुपए से संसाधन जुटाए जाते हैं। ताकि, लाइन लॉस थमे। उपभोक्ताओं को सुचारु आपूर्ति हो। लेकिन, असल बात हटकर है। बिजली कंपनी के ही आंकड़े बता रहे हैं कि मैदानी अमले की भारी कमी है। उपभोक्ता लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर महीने लाइन कर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस समय शहर में तकरीबन पौने चार लाख उपभोक्ता हैं। इनकी छोटी-बड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए तकरीबन साढ़े तीन सौ का ही मैदानी अमला है। उधर, लोकसभा के पटल पर सरकार ने हाल ही में आंकड़ा प्रस्तुत किया। इसमें मप्र की विद्युत वितरण कंपनी का घाटा चौंकाने वाला है।

bijli
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मप्र में वितरण कंपनी को हानि
वर्ष 2017-18 में 5802 करोड़
वर्ष 2018-19 में 10143 करोड़
वर्ष 2019-20 में 5762 करोड़

स्थानीय लाइन लॉस की स्थिति

डिवीजन-उपभोक्ता-लॉस
वेस्ट डिवीजन-57898-12.96
नार्थ डिवीजन-79047-15.45
साउथ डिवीजन-95651-18.83
ईस्ट डिवीजन-65920-37.55
विजयनगर डिवीजन-58358-15.34

लाइन लॉस की प्रमुख वजह
-बिजली के तारों का झूलना
-ट्रांसफार्मर फ्यूज लूज होना
-पुराने तारों का गर्म होना
-बिजली चोरी होना
-लाइनों का मेंटेनेंस न होना

इतने पद हैं खााली
लाइन परिचालक -77
वरिष्ठ लाइन सहायक-16
वरिष्ठ लाइन परिचालक-112
पर्यवेक्षक -13

यह है स्थिति
-3.56 लाख उपभोक्ता
-37 फीसदी तक लाइन लास
-20 फीसदी बिजली चोरी

मकड़ी के जाले जैसे तार
शहर के विभिन्न हिस्सों में लाइन लॉस 12 से लेकर 38 फीसदी तक बना हुआ है। बिजली कंपनी लाइन लॉस रोकने का दावा करती है। लेकिन, मकड़ी के जालों की तरह उलझे तार गवाही दे रहे हैं कि लाइन लॉस मैदानी वर्तमान अमले की कार्यप्रणाली में कम हो नहीं सकता। शहर में बिजली कनेक्शन लगातार बढ़ रहे हैं। मेंटेंनेस की व्यवस्था ठेका आधारित होने के कारण भी कर्मचारी जवाबदेही से बचते हैं। बिजली चोरी भी बेलगाम है। पूर्व, उत्तर सम्भाग में बिजली चोरी के मामले बढ़े हैं। अधारताल, पासियाना, मदार टेकरी, अमखेरा, मानेगांव, रानीताल में इस तरह के कई मामले पकड़े गए हैं। बिजली महकमे में इंजीनियर, लाइन पर्यवेक्षक, वरिष्ठ लाइन सहायक, लाइन सहायक, वरिष्ठ लाइन परिचालक और लाइन परिचालकों की जरूरत पड़ती है। इनकी पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने पर सब स्टेशन में सुधार, बिजली फॉल्ट, मीटर लगाना, मीटर बदला, ट्रांसफार्मर से खराबी होने पर उपभोक्ता दफ्तर तक पहुंच जाते हैं।


-लाइन लॉस रोकने के लिए लागातार समीक्षा की जाती है। बिजली चोरी के कारण भी लाइन लॉस प्रभावित होता है। इसके लिए ऐसे इलाकों में प्रकरण कायम करते हैं।
-हिमांशु अग्रवाल, डीई शहर वृत्त

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