देवशयनी एकादशी आज: इस बार पांच माह विश्राम करेंगे भगवान, भगवान विष्णु की पूजा से पूरें होंगे मनोरथ

आज योगनिद्रा में जाएंगे भगवान 4 माह 25 दिन न होंगे शुभकार्य

 

By: Lalit kostha

Published: 01 Jul 2020, 11:27 AM IST

जबलपुर। देवशयनी एकादशी (बुधवार) से हिन्दू धर्मावलम्बियों के विवाह आदि शुभकार्य चार माह 25 दिन के लिए रुक जाएंगे। मान्यता है कि इस एकादशी से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए अपनी योग निद्रा में चले जाते हैं। इस कारण इन महीनों में किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि यह व्रत को रखने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। रोहित दुबे ने बताया कि एकादशी तिथि का प्रारम्भ 30 जून की शाम 07.49 बजे से हो जाएगा और इसकी समाप्ति एक जुलाई को शाम 05.29 बजे पर होगी। व्रती सुबह से लेकर शाम तक किसी भी समय पूजा कर सकते हैं। व्रत का पारण दो जुलाई की सुबह पांच सुबह से 07.40 सुबह तक किया जा सकता है।

 

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ऐसे करें पूजन
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले भगवान विष्णु को प्रणाम करें। इसके बाद गंगाजल युक्तपानी से स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान सूर्य को जल का अघ्र्य दें। अब भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, दूध, दही, पंचामृत, धूप-दीप आदि से करें। भगवान की आरती उतारें। दिन भर उपवास रखें और शाम के समय एक बार फिर से भगवान की पूजा कर उनकी आरती करें। व्रत कथा सुनें। श्रीहरी को पीली वस्तुओं का भोग लगाएं। उसके बाद फलाहार करें। अगले दिन सुबह शुभ मुहूर्त में विष्णु जी की पूजा कर व्रत खोलें।

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IMAGE CREDIT: patrika

आषाढ़ी एकादशी पूजा विधि ( Puja Vidhi and muhurat ) ...

एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। आषाढ़ी एकादशी या देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु का शयन प्रारंभ होने से पहले विधि-विधान से पूजन करने का बड़ा महत्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

: वे श्रद्धालु जो देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें प्रात:काल उठकर स्नान करना चाहिए।
: पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर विराजमान करके भगवान का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए।
: भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला चंदन चढ़ाएं। उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित करें।
: भगवान विष्णु को पान और सुपारी अर्पित करने के बाद धूप, दीप और पुष्प चढ़ाकर आरती उतारें और इस मंत्र द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति करें…

‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्।
विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।'

अर्थात हे जगन्नाथ जी! आपके निद्रित हो जाने पर संपूर्ण विश्व निद्रित हो जाता है और आपके जाग जाने पर संपूर्ण विश्व तथा चराचर भी जाग्रत हो जाते हैं।

: इस प्रकार भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन या फलाहार ग्रहण करें।
: देवशयनी एकादशी पर रात्रि में भगवान विष्णु का भजन व स्तुति करना चाहिए और स्वयं के सोने से पहले भगवान को शयन कराना चाहिए।

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Lalit kostha Desk
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