डॉक्टर साब कब आएंगे, वे ही जानते हैं, यहां तो फॉर्मासिस्ट ही लिख देते हैं दवाई

डॉक्टर साब कब आएंगे, वे ही जानते हैं, यहां तो फॉर्मासिस्ट ही लिख देते हैं दवाई
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Shyam Bihari Singh | Publish: Jun, 16 2019 08:00:00 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अव्यवस्था, चक्कर काटते हैं मरीज

जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से खोले गए शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की नब्ज स्टाफ नर्स टटौल रही है। सर्दी-खांसी और बुखार के लक्षण के आधार पर फॉर्मासिस्ट दवा प्रिस्काइब कर रहे है। यह स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में चिकित्सकों के समय पर नहीं पहुंचने के कारण बन रही है। 'पत्रिकाÓ ने कुछ पीएचसी का जायजा लिया तो हालात बेहद चौंकाने वाले मिले। ज्यादातर पीएचसी में अव्यवस्थाएं हावी मिली। कुछ जगह पर मरीजों की होने वाली पैथोलॉजी जांच बंद मिली। डिस्पेंसरी खुलने के मनमाने समय के कारण मरीज वहां चक्कर काटते मिले। प्राथमिक स्तर पर ही लडख़ड़ाई व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की मरीजों की जांच और परामर्श के लिए कई व्यवस्था की पोल खोल रही है।
उखरी रोड: बोर्ड तक धुंधला पड़ा
बलदेवबाग से उखरी तिराहा के बीच एक दुकान नुमा घर पर पीएचसी है। बोर्ड धुंधला पड़ चुका है। उसमें सिर्फ 'उखरी रोडÓ लिखा नजर आता है। दोपहर 12.10 बजे वहां पर डॉक्टर के आने का इंतजार हो रहा था। अन्य स्टाफ मरीजों को फस्र्ट एड दे रहे थे। यहां पदस्थ एकमात्र टेक्नीशियन जिला अस्पताल में अटैच होने के कारण मरीजों को जांच के लिए विक्टोरिया तक ही भागना पड़ रहा था। पीएचसी खुलने का समय दोपहर 12 से रात 8 है। लेकिन मरीजों ने बताया कि शाम को 6 बजे ही केंद्र बंद हो जाता है।
कोतवाली: एक बजे से पहले ही लंच
सिटी डिस्पेंसरी के नाम से पहचानी जाने वाले इस पीएचसी में भवन, साफ-सफाई, मरीजों के बैठने की व्यवस्था से लेकर बुनियादी व्यवस्था चकाचक थी। दोपहर 12.43 बजे डॉक्टर चेंबर से नदारद थे। एक नर्स गर्भवती महिला को परामर्श दे रही थी। गोहलपुर निवासी एक मरीज को डॉक्टर के लंच पर होने की जानकारी देकर बाद में आने का कहकर लौटा दिया गया। काउंटर पर पर्ची बना रहे कर्मी ने बताया कि पीएचसी खुलने का समय सुबह 8 से 1 और दोपहर 2.30 से 4 बजे है। मरीजों की मानें तो चिकित्सक समय पर नहीं मिलते।
स्नेह नगर: दरवाजे पर जड़ा था ताला
जेडीए कॉम्प्लेक्स के सब्जी के सामने पार्क के पास एक घर में खुली इस पीएचसी का कोई बोर्ड नहीं है। दोपहर 1.20 डिस्पेंसरी के गेट पर ताला लटका था। वहां खड़ी महिला श्यामाबाई ने बताया कि दोपहर 12 लेबर चौक के पास रहने वाली लेडी डॉक्टर आयी थी। 1 बजे लंच पर चली गई। लंच के बाद जब आएंगी तो 4 बजे तक जांच होगी। स्थानीय लोगों की मानें तो जब डॉक्टर आती है तब डिस्पेंसरी खुलती है। नियमित नहीं होने के कारण कई मरीज बिना जांच के ही लौट जाते है।
लापरवाही से बिगड़ती तबियत
पीएचसी के आसपास के लोगों की मानें तो जांच नहीं होने के कारण ज्यादातर पीएचसी में चिकित्सक मनमानी कर रहे हैं। ज्यादातर पीएचसी को सरकारी अस्पताल की ओपीडी के समय पर खुलना है। दिहाड़ी मजदूरों की सुविधा के लिए कुछ डिस्पेंसरी को दोपहर 12 से रात 8 बजे खोलने के निर्देश है। लेकिन टाइमिंग प्रदर्शित नहीं किए जाने के कारण मरीज असमंजस में रहते है। फिर जब पहुंचते है तो डॉक्टर नहीं मिलते। इस लापरवाही के कारण गंभीर मरीज को समय पर उपचार नहीं मिलने और जिला/मेडिकल अस्पताल तक नहीं पहुंचने से मौत होने आशंका रहती है।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर्स के परामर्श का समय निर्धारित है। मरीजों को प्राथमिक उपचार मुहैया कराने के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। जांच में यदि चिकित्सक समय पर उपस्थित नहीं मिले तो कार्रवाई होगी।

-डॉ. एमएम अग्रवाल, सीएमएचओ

यह है स्थिति
-17 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है शहर में
-02 शेड्यूल है पीएचसी के खुलने के लिए
- 40 प्रतिशत के करीब स्टाफ के पद खाली है

यहां पीएचसी
घमापुर, रांझी बड़ा पत्थर, मोतीनाला, अधारताल, सुहागी, उखरी, शांति नगर, हाथीताल, स्नेह नगर, शंकरशाह, पोलीपाथर, परसवाड़ा, भोगाद्वार, कोतवाली, संजय नगर, आयुर्वेदिक कॉलेज, तिलवारा।

तिलहरी विस्थापित बस्ती में डॉक्टर तैनात
स्वास्थ्य विभाग ने तिलहरी विस्थापित बस्ती में बीमारियों की रोकथाम और मरीजों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक आयुष डॉक्टर की नियमित तैनाती कर दी है। बरेला पीएचसी के स्टाफ को जांच के काम कर लगाया है। यहां कैंप में प्राथमिक उपचार की सुविधा है। इमरजेंसी में मरीज को विक्टोरिया भेजने के लिए एंबुलेंस तैनात की गई है।

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