डुमना ग्रीन स्पोर्टस सिटी पर हाईकोर्ट ने कही ये बड़ी बात, जिम्मेदारों से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने डुमना में निर्माण के मसले पर कहा.. एपको को भी पक्षकार बनाने का निर्देश
हम चाहते हैं पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन, बताएं ठोस उपाय

By: Lalit kostha

Published: 29 Jun 2021, 02:26 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि हम पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन चाहते हैं। लिहाजा सरकार से विमर्श कर महाधिवक्ता कोर्ट को यह बताएं कि जबलपुर के डुमना नेचर रिजर्व में स्थित खंदारी जलाशय का कैचमेंट एरिया कैसे संरक्षित किया जा सकता है? चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि डुमना क्षेत्र में आवंटित भूमि पर जो निर्माण योजनाएं अभी शुरू नहीं हुई हैं, क्या उन्हें रोका जा सकता है। कोर्ट ने महाधिवक्ता पीके कौरव को सरकार से निर्देश लेकर 7 जुलाई तक सुझावों सहित अपना जवाब पेश करने को कहा। कोर्ट ने एपको (एनवायरनमेंट प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन) को भी पक्षकार बनाकर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

यह है मामला
जबलपुर निवासी जगत जोत सिंह, निकिता खम्परिया, विवेक शर्मा की ओर से एक, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दूसरी व रिटायर्ड कर्नल एके रामनाथन, एरिक डी सुन्हा व रुद्राक्ष पाठक की ओर से तीसरी याचिका दायर की गई। इन याचिकाओं की सुनवाई एक साथ हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा, अंशुमन सिंह, दिनेश उपाध्याय ने वीसी के जरिए कोर्ट को बताया कि डुमना नेचर पार्क जबलपुर का एकमात्र संरक्षित वन क्षेत्र है। यहां वन्य जीवों की विविधता मे बहुतायत है। लेकिन जिला प्रशासन व वन विभाग यहां एक कृत्रिम टाइगर सफारी निर्माण की तैयारी कर रहा है। तर्क दिया गया कि चिडिय़ाघर की तर्ज पर बनाई जाने वाली टाइगर सफारी के बनने से पार्क में वन्य जीवन के लिए अवांछित गतिविधियां आरम्भ हो जाएंगी। इससे न केवल यहां के वन्य जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ेगा, बल्कि प्राकृतिक पर्यावरण भी प्रदूषित होने की आशंका है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जबलपुर को भी इंदौर, भोपाल की तरह विकास की जरूरत है। लेकिन विकास के लिए पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि डुमना वन्य क्षेत्र और वहां के वन्य प्राणियों का संरक्षण जबलपुर के हित में है। जरूरत पडऩे पर सरकार को वहां निर्माण रोकने चाहिए।

 

Dumna Nature Park
IMAGE CREDIT: patrika

महत्वपूर्ण है मसला
महाधिवक्ता पीके कौरव ने कहा कि यह मसला जबलपुर के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक महाधिवक्ता के नाते नही, एक नागरिक के नाते वे पर्यावरण के महत्व को समझते हैं। हर किसी को पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए और वे भी करते हैं। उन्होंने कहा कि डुमना क्षेत्र प्रकृति का जबलपुर को उपहार है। हमे इसके संरक्षण की जरूरत है। उन्होंने कोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया कि एपको की उक्त रिपोर्ट जिस याचिका में आई थी, वह अभी लम्बित है। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई पर उस याचिका को भी इस मसले के साथ संलग्न कर सुनने का निर्देश दिया। उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली व नगर निगम की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह उपस्थित हुए।

खंदारी का है कैचमेंट एरिया
सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 2015 में एक लम्बित याचिका की सुनवाई के दौरान एपको ने एक रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार डुमना और खंदारी जलाशय के बीच का एरिया खंदारी जलाशय का कैचमेंट एरिया है। इसी इलाके के वर्षाजल संग्रहण से खंदारी जलाशय में पानी एकत्र होता है। जिससे जबलपुर शहर को पेयजल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिलता है। सीनियर एडवोकेट शर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस रिपोर्ट में खंदारी जलाशय के कैचमेंट एरिया में कोई भी निर्माण न होने देने की अनुशंसा की गई थी। लेकिन राज्य सरकार ने रिपोर्ट की अनुशंसाओं का लेशमात्र पालन नही किया। उन्होंने कहा कि अब सरकार डुमना में स्पोट्र्स सिटी बनाने जा रही है। इसके अलावा भी कई निर्माणों को मंजूरी दी गई है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से इन निर्माणों को रोका जाना निहायत जरूरी है।

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