कार्यपरिषद नहीं बना सकती शासी निकाय सदस्य: उपसचिव

नियमों में उलझा कॉलेजों में शासी निकाय की नियुक्ति का मामला, उच्च शिक्षा विभाग उप सचिव ने शासी निकाय में ईसी मेंबर की नियुक्ति को गलत बताया, वेटरनरी विवि में मिलेंगी डिग्रियां

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा प्राइवेट कॉलेजों में शासी निकाय में की गई सदस्यों की नियुक्ति के मामले में नियमों का फंसा पेंच और उलझ गया है। उच्च शिक्षा विभाग में उप सचिव ललित दाहिमा ने कहा कि अब कार्यपरिषद सदस्य प्राइवेट कॉलेजों में शासी निकाय के सदस्य नहीं बन सकते हैं। उन्होंने राज्य सरकार के नियम का हवाला दिया और कहा कि कार्यपरिषद सदस्य अब सिर्फ कार्यपरिषद में ही सदस्य रहेंगे। अन्य किसी भी समिति में उनकी भागीदारी नहीं होंगे।
उप सचिव के बयान के कुछ समय के अंदर ही रादुविवि में कार्यपरिषद सदस्य दिनेश सिंह ने कुलससचिव डॉ. एमएस अवास्या को एक शिकायती पत्र थम दिया गया। इसमें कुलसचिव द्वारा हाल ही शासी निकाय में नियुक्त किए गए सदस्यों की सूची को खारिज करने की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई गई। ईसी मेंबर ने पूछा है कि जब राज्य सरकार वर्ष 2012 में नियम  संशोधित किया है, तो फिर विवि ने इस वर्ष 17 जुलाई को जारी आदेश में शासी निकाय में ईसी मेंबरों को सदस्य क्यों बनाया?  इस मसले पर 6 कॉलेज में शासी निकाय में शामिल किए गए कार्यपरिषद सदस्य के विरोध और उपसचिव के बयान से विवाद बढ़ गया है।
स्वीकृत पद से अधिक नहीं हो सकते अतिथि
अतिथि विद्वानों की नियुक्ति संबंधी एक सवाल के जवाब में उपसचिव ने कहा कि विवि और कॉलेज में नियमित अध्यापकों के रिक्त पदों के विरुद्ध ही अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की जा सकती है। रिक्त पदों से अधिक अतिथि विद्वानों की नियुक्ति अवैध है। उप सचिव ने प्राइवेट कॉलेज में कोड-28 के तहत अध्यापकों की नियुक्ति में भी राज्य सरकार के प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य होने की बात कही है। इससे भी विवि में अतिथि विद्वानों और कोड-28 की नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी पर अपरोक्ष रुप से सवाल उठ गए है।
वेटरनरी विवि में दो साल बाद मिलेगी डिग्री
वेटरनरी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र-छात्राआें का डिग्री मिलने का इंतजार समाप्त हो गया है।  दो वर्ष से लंबित डिग्री के प्रकरण को सोमवार को वीयू की एकेडेमिक काउंसिल की बैठक में रखा गया। इसमें दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं होने के कारण सैकड़ों छात्र-छात्राओं के डिग्री से वंचित होने पर चर्चा हुई। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने डिग्री के अभाव में छात्र-छात्राओं की परेशानी का हवाला दिया। इस पर सभी सदस्यों ने डिग्री बांटने की प्रक्रिया शुरू करने की सहमति दी। इस फैसले पर 30 सितंबर को प्रस्तावित बोर्ड की बैठक में औपचारिक मुहर लगेगी।
दीक्षांत समारोह के बाद डिग्रियों का वितरण
बैठक में कुलपति प्रो. एसएनएस परमार, कुलसचिव डॉ. राजेश गुप्ता उपस्थित थे।  वीयू में स्थायी कुलपति के नहीं होने से दो वर्ष से दीक्षांत समारोह नहीं हुआ है। इससे सत्र 2012-13 और 2013-14 के छात्र-छात्राओं को डिग्री प्राप्त नहीं हुई  है। विवि के प्रावधानों के मुताबिक दीक्षांत समारोह के बाद ही संबंधित सत्र की डिग्रियों का वितरण होता है। इस नियम के फेर में बीवीएससी, एमवीएससी और पीएचडी के छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद भी डिग्री नहीं मिली है।



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