देवशयनी एकादशी पर करें भगवान विष्णु की पूजा, मनोकामना होगी पूरी: पंचांग

देवशयनी एकादशी पर करें भगवान विष्णु की पूजा, मनोकामना होगी पूरी: पंचांग

 

By: Lalit kostha

Published: 01 Jul 2020, 10:58 AM IST

जबलपुर। शुभ विक्रम संवत् : 2077, संवत्सर का नाम : प्रमादी, शाके संवत् : 1942, हिजरी संवत् : 1441 , मु.मास : जिल्काद 0, अयन : उत्तरायण, ऋतु : ग्रीष्म ऋतुु , मास : आषाढ़ , पक्ष : शुक्ल पक्ष
तिथि - सूर्योदय से दोप. 05.29 मि. तक नंदा संज्ञक एकादशी तिथि रहेगी पश्चात भद्रा संज्ञक द्वादशी तिथि लगेगी। एकादशी तिथि को विश्वेदेवों की भली प्रकार से पूजा करनी चाहिए। वे भक्त को संतान, धन-धान्य और पृथ्वी प्रदान करते हैं। द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करके मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में वैसे ही पूज्य हो जाता है, जैसे किरणमौली भगवान सूर्य पूज्य हैं।
योग- सूर्योदय से प्रात: 11.17 मि. तक सिद्ध योग पश्चात साध्य योग लगेगा। सिद्ध योग के स्वामी भगवान कार्तिकेय हैं जबकि साध्य योग की स्वामी सावित्री देवी मानी गई हंै।
विशिष्ट योग- सिद्ध एवं साध्य दोनों ही योग को बेहद शुभ माना जाता है। सिद्ध योग में सामाजिक तथा पारिवारिक कार्य सफल रहते हैं। विशिष्ट कार्य हेतु मंत्र सिद्धि के लिए साध्य योग सफलता देता है।
करण- सूर्योदय से प्रात: 06.39 मि. तक वणिज नामक करण रहेगा पश्चात विष्टि नामककरण लगेगा। इसके पश्चात बव नामक करण लगेगा।
नक्षत्र- सूर्योदय से अर्धरात्रि 02.33 मि. तक मिश्र साधारण विशाखा नक्षत्र रहेगा पश्चात मृदु मैत्र अनुराधा नक्षत्र लगेगा। औषधि एवं रसायन के निर्माण, औषधि सेवन, सर्जरी और चिकित्सा संबंधी अन्य कार्यों के लिए विशाखा एवं अनुराधा दोनों नक्षत्र शुभ माने गए हैं। वही संन्यास, गृह त्याग, वानप्रस्थ, मुकदमेबाजी, भिक्षुक आदि कार्य विशाखा नक्षत्र में किए जा सकते हैं।

ekadashi 1 july 2020 vishnu puja vidhi with panchang muhurat
IMAGE CREDIT: patrika

आज के मुहूर्त - अनुकूल समय में चातुर्मास व्रत नियमादि की शुरुआत करने के लिए शुभ मुहूर्त है।
श्रेष्ठ चौघडि़ए - प्रात: 05.47 मि. से 09.07 मि. तक क्रमश: लाभ व अमृत के चौघडिय़ा रहेंगे। प्रात: 10.47 मि. से दोप. 12.28 मि. तक शुभ का चौघडिय़ा रहेगा एवं दोप. 03.48 मि. से सायं: 07.09 मि. तक क्रमश: चंचल व लाभ के चौघडिय़ा रहेंगे।
व्रत/पर्व - देवशयनी एकादशी व्रत सबका। हरिशयनी एकादशी। रविनारायण एकादशी (उड़ीसा)। चातुर्मास विधान प्रारंभ। श्रीविष्णु शयनोत्सव। पण्डरपुर यात्रा। उल्टा रथ (उड़ीसा)। बहुधा यात्रा। दादामेला अजमेर (866वां)। चंद्रमा - सूर्योदय से रात्रि 08.55 मि. तक चंद्रमा वायु तत्व की तुला राशि में रहेंगे, पश्चात जल तत्व की वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

भद्रा - प्रात: 06.39 मि. से दोप. 05.29 मि. तक भद्रा का निवास पाताल में रहेगा। दिशाशूल- उत्तर दिशा में। (आज के दिन उत्तर दिशा में यात्रा को टालना चाहिए)। राहु काल - दोप. 12.28.14 से 02.08.30 तक राहु काल वेला रहेगी। इस समय में शुभ कार्यों को करने से बचना चाहिए।
आज जन्म लिए बच्चे- आज जन्म लिए बच्चों के नाम (ती, तू, ते, तो, ना) अक्षरों पर रख सकते हैं। आज जन्मे बच्चंों का जन्म लोहे के पाए में होगा। सूर्योदय से रात्रि 08.55 मि. तक तुला राशि रहेगी पश्चात वृश्चिक राशि रहेगी। आज जन्म लिए बच्चे शरीर से कोमल होंगे। सामान्यत: इनका भाग्योदय करीब 25 वर्ष की आयु में होगा। इनकी रुचि कृषि कार्यों में रहेगी। थोड़े स्पष्टवादी व असंतुष्ट रहेंगे। ऐसे जातक स्वकार्य में सुदक्ष व धनसम्पदा से भरे होंगे। तुला राशि में जन्मे जातक को कुपित होने से बचना चाहिए। वृश्चिक राशि में जन्मे जातक को अनैतिक कर्म से बचना चाहिए।

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Lalit kostha Desk
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