scriptencroachment in forest area | 1980 में तीन लाख हेक्टेयर वन भूमि पर था अवैध कब्जा, 2022 तक 57 लाख हेक्टेयर में पहुंच गए कब्जाधारी | Patrika News

1980 में तीन लाख हेक्टेयर वन भूमि पर था अवैध कब्जा, 2022 तक 57 लाख हेक्टेयर में पहुंच गए कब्जाधारी

वन भूमि में लगातार अतिक्रमण होने के कारण पर्यावरण परिवर्तन के दुष्प्रभाव आ रहे सामने

जबलपुर

Published: May 04, 2022 09:47:01 pm


वीरेन्द्र कुमार रजक @
जबलपुर, वन भूमि पर लगातार अतिक्रमण बढ़ रहा है। प्रदेश सरकारें भी अतिक्रमणकारियों को वन्य भूमि में रहने के लिए पट्टा दिए जा रहीं है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1980 में देश में कुल तीन लाख हेेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमणकारियो का कब्जा था। वर्ष 2001 में सरकारों ने बताया कि यह 15 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण हो गया है। इसके बावजूद अतिक्रमण रोकने कोई प्रयास नहीं हुए और वर्ष 2022 तक वन भूमि की 57 लाख हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया। इतना नही नहीं प्रदेश सरकारों ने उन्हें पट्टे भी आवंटित कर दिए। जिस कारण वन्य क्षेत्र 1980 के मुकाबले वर्ष 2022 में तेजी से कम हुआ।
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वीके बहुगुणा, रिटायर्ड महानिदेशक, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार
देश में वनों और ट्री कवर की स्थिति
71.03 मिलीयन हेक्टेयर फॉरेस्ट एरिया है पूरे देश में सरकारी रिकॉर्ड में
21.07 प्रतिशत है पूरे देशभर के भौगोलिक क्षेत्रफल का
09.43 मिलीयन हेक्टेयर में ट्री कवर पूरे देश में
वन भूमि कम होने के कारण यह दुष्परिणाम आ रहे सामने
- जमीन का जल स्तर लगातार हो रहा कम
- पर्यावरण परिवर्तन पर तेजी से हो असर
- ट्रायबल और नॉन ट्रायबल लघु वन लगातार हो रहे कम
- वन पर आधारित व्यवयासों में असर
- टिम्बर कारोबार पर हो रहा विपरीत असर
- वन क्षेत्र कम होने के कारण कई नदियों के अस्तित्व पर संकट
- औषधियों में लगातार गिरावट
- खाद्य से जुड़ी सामग्री पर भी संकट
कम हुआ है वन क्षेत्र
हाल ही में आई भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2021 के अनुसार देश में मध्यम घने जंगलों या ‘प्राकृतिक वन’ में 1,582 वर्ग किलोमीटर की गिरावट आई है। यह गिरावट खुले वन क्षेत्रों में 2,621 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि के साथ-साथ देश में वनों के क्षरण को दर्शाती है। साथ ही झाड़ी क्षेत्र में 5,320 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र में वनों के पूर्ण क्षरण को प्रदर्शित करता है। इसके पीछे का एक कारण वन्य भूमि पर लगातार होने वाला अतिक्रमण भी है।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के रिटायर्ड महानिदेशक वीके बहुगुणा का कहना है कि

वर्ष 1980 में प्रदेश सरकारों ने कुल तीन लाख हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण होने की जानकारी दी थी। वर्तमान में 57 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर विभिन्न राज्य सरकारों ने कब्जाधारियों को पट्टा दे दिया है। इससे वन और वन्य क्षेत्र समेत वन्य प्राणी संकट में आ रहे है। सरकारों को एक तारीख निर्धारित करनी चाहिए। इसी तारीख के पूर्व वन्य क्षेत्र में रहने वालों को रहने की अनुमति देनी चाहिए, अन्य कब्जाधारियो को वहां से हटाना चाहिए। यदि इसे नहंी रोका गया, तो भविष्य में यह कब्जा और बढ़ेगा। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन भूमि का आवंटन बंद होना चाहिए। ट्रायबल के अलावा देश में 25 से 30 करोड़ की आबादी वन पर निर्भर है। संयुक्त प्रबंधन के साथ ही वहीं वन क्षेत्र को संरक्षित करने सरकारों को 15 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की आवश्कता है।

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