सोने की ईंटों पर खड़ा है ये किला, लोगों ने किया ये काम

सोने की ईंटों पर खड़ा है ये किला, लोगों ने किया ये काम

Lalit kostha | Publish: Sep, 05 2018 10:31:27 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

सोने की ईंटों पर खड़ा है ये किला, लोगों ने किया ये काम

 

जबलपुर. रानी दुर्गावती का मिला मदन महल सोने की ईंटों पर खड़ा है। ये कहावत सदियों से लोग सुनते आ रहे हैं। इसी के चलते किले को खुर्द बुर्द करने में लोगों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ऐसा भी कहा जाता है कि रानी दुर्गावती ने इस किले किसी एक हिस्से में सोने की ईंटें दबाकर रखी थीं, जो अब भी साबुत हैं। ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद सरकार ने इसके संरक्षण में रुचि नहीं दिखाई है। अब हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को हटाने पर सख्ती दिखाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

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किले से अतिक्रमण हटाने को कहा था, व्याख्या करने के लिए नहीं
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुनाई खरी-खरी
दो सप्ताह में कार्रवाई कर फिर से रिपोर्ट देने को कहा

हाईकोर्ट ने मदनमहल किले के साथ शहर की अन्य पहाडिय़ों पर अतिक्रमण के चलते उनके नैसर्गिक सौंदर्य को उत्पन्न खतरे के मसले पर सख्ती अपनाई है। जस्टिस आरएस झा व जस्टिस संजय द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने सरकार की रिपोर्ट को ठुकराते हुए खरी-खरी सुनाई। कोर्ट ने कहा कि हमने किले की जमीन से अतिक्रमण हटाते के लिए कहा था, आदेश की मनमानी व्याख्या करने के लिए नहीं। कोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह के अंदर कार्रवाई कर फिर से रिपोर्ट पेश करने को कहा। कोर्ट रूम नंबर तीन में मामले की सुनवाई हुई ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनोज शर्मा : माय लॉर्ड, राज्य सरकार ने रिपोर्ट में बताया है कि किले से 100 से 300 मीटर दूरी तक अतिक्रमण हटा दिए गए। जबकि 20 जुलाई को कोर्ट ने पहाड़ी के सभी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट (सरकारी वकील पर नाराजगी जाहिर करते हुए ): 2016 में कोर्ट ने संयुक्त कमेटी का गठन कर यहां के अतिक्रमण हटाने को कहा था। 20 जुलाई 2018 को भी कोर्ट ने पहाड़ी के सारे अतिक्रमण हटाने को कहा था। इसके बाद आप कह रहे हैं कि फलां जगह से हटाए गए हैं, अमुक जगह के बाकी हैं। यह तो आदेश की व्याख्या हुई। इसका पालन नहीं।

 

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याचिकाकर्ता के वकील शर्मा : माय लॉर्ड, सरकार केवल कागजी कार्रवाई कर रही है। पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक बैंलेसिंग रॉक को भी निजी शिक्षण संस्था ने अपनी बाउंड्रीवाल बनाकर ढक दिया है। यह अब दूर से दिखता भी नहीं।
कोर्ट : ( कड़े स्वर में सरकार से) आप कोर्ट के आदेश की व्याख्या करने का अधिकार किसने दिया। आपकी रिपोर्ट मंजूर नहीं है। पूर्वादेश का पालन कर रिपोर्ट पेश की जाए।
याचिकाकर्ता के वकील शर्मा : माय लॉर्ड, मास्टर प्लान में भी साफ है कि पहाडिय़ों पर कोई निर्माण नहीं हो सकता।
सरकारी वकील : माय लॉर्ड, फिर से रिपोर्ट पेश करने के लिए मोहलत दी जाए।
कोर्ट : ठीक है, लेकिन इस बार 20 जुलाई के आदेश का पूरी तरह पालन कर रिपोर्ट दी जाए। इसमें कोई कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। संभागायुक्त भी आगामी सुनवाई पर हाजिर रहे। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

यह है मामला :
2012 में गढ़ा गोंडवाना संरक्षण समिति की ओर से किशोरीलाल भलावी ने यह याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि मदनमहल के ऐतिहासिक किले की करीब 6 हेक्टेयर जमीन पर सैकड़ों की संख्या में अतिक्रमण कर लिए गए हैं। इनकी वजह से पहाड़ी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। 2014 में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि मदनमहल ही नहीं, शहर की सभी पहाडिय़ों पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया है। इसके चलते शहर का प्राकृतिक पर्यावरण असंतुलित हो गया है। दोनों याचिकाओं की साथ सुनवाई हो रही है। कोर्ट ने 20 जुलाई 2018 को कहा था संभागायुक्त की अगुवाई में संयुक्त टीम गठित की जाए।

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