सूखने लगे खेत, धान की फसल पर संकट

मौसम की बेरुखी : सिहोरा-मझौली तहसील में अब तक 32 इंच बारिश

By: sudarshan ahirwa

Updated: 05 Sep 2019, 12:25 AM IST

जबलपुर. सिहोरा. मौसम की बेरुखी के चलते धान की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। खेत सूखने की कगार पर है। अगर यही हालात कुछ दिन और रहे तो सिहोरा- मझौली तहसील में धान की फसल का उत्पादन प्रभावित होगा। धान को बचाने के लिए अब किसानों के पास ट्यूबवेल का ही सहारा बचा है। इसमें भी थ्री फेज बिजली बराबर नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं।

जानकारी के मुताबिक सिहोरा-मझौली तहसील में करीब 42 हजार हेक्टेयर में किसानों ने धान की बोनी की है, लेकिन मौसम की बेरुखी और अल्पवर्षा के चलते खेतों में लगी धान सूखने की कगार पर पहुंच गई है। किसानों की मानें तो वह जैसे तैसे नहर और ट्यूबवेल से मिलने वाले पानी से धान को सूखने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो धान का उत्पादन प्रभावित होगा। सावन तो पहले भी सूखा बीत गया था, भादों में बारिश होने से किसानों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन इस वर्ष झमाझम बारिश बारिश नहीं हुई। हालात यह हैं कि खेतों में जो थोड़ा बहुत बारिश का पानी बचा था वह भी सूख गया है।

3 से 4 घंटे मिल रही बिजली
किसानों की मानें तो उन्हें धान की सिंचाई के लिए सिर्फ तीन से चार घंटे ही बिजली मिल पा रही है। उसमें भी इतनी बार ट्रिपिंग होती है कि खेतों तक पानी ही नहीं पहुंच पाता। ऐसे में किसान दोहरी मार से परेशान हैं।

809 मिमी बारिश अब तक
सिहोरा और मझौली तहसील के ज्यादातर हिस्से में धान की फसल बोई जाती है। मझौली तहसील का लमकाना क्षेत्र धान के कटोरा के नाम से प्रसिद्ध है। तहसील में अब तक 809 मिलीमीटर (32 इंच) बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष तहसील में आज के दिन तक 1253 मिलीमीटर (49 इंच) बारिश दर्ज की गई थी। तहसील में औसत बारिश 44 इंच मानी जाती है, जो अब भी 12 इंच कम है।

कम बारिश के चलते धान का उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है। बारिश का दौर थमने से खेतों में पानी सूख गया है। ऐसे में नहर और ट्यूबवेल से धान की सिंचाई का काम किसान कर रहे हैं।
जीपी पटेल, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, मझौली

sudarshan ahirwa
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned