किसान आंदोलन के बीच MP के इस शहर में किसान पिता-पुत्र ने फांसी लगा कर दी जान

-घर से निकले साथ पर खेत तक पहुंचते-पहुंचे हुआ विवाद
-पहले बेटे ने लगाई फांसी फिर पिता भी चढ़ गया सूली पर

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 02 Jan 2021, 03:41 PM IST

जबलपुर. एक तरफ दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान सहित पूरे देश के किसान कृषि कानूनों को रद्द कराने को लेकर आंदोलित हैं। वहीं सरकार संग कई चक्र की वार्ता हो चुकी है। हालांकि अभी तक समस्या का हल नहीं निकला है। चालू माह के पहले सप्ताह में अगले चक्र की वार्ता प्रस्तावित है। इस बीच किसान बेहाल हैं। कड़कड़ाती ठंड में भी वह सड़कों पर बैठे हैं। वो अपने समुदाय की रक्षा के लिए आंदोलित हैं। इस बीच जबलपुर के मझगांवा थाना क्षेत्र से बुरी खबर आई है। पता चला है कि किसान पिता-पुत्र, खेत के पास अलग-अलग पेड़ों पर फांसी पर झूल गए।

किसान ने की खुदकुशी

मझगवां थाना क्षेत्र के फनवानी में रहने वाले किसान पिता और पुत्र ने पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह देख सभी सकते में आ गए। पल भर में ही यह खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई। मौके पर ग्रामीणों का हुजूम जमा हो गया। उधर किसान परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल था। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पेड़ से नीचे उतारकर पीएम के लिए भिजवाते हुए जांच शुरू कर दी है।

मझगवां टीआइ अन्नी लाल सैयाम ने बताया कि शनिवार की सुबह लगभग 10 बजे सूचना मिली कि फनवानी में रहने वाले सरमन पटेल (28) और उसके पिता चर्तुभुज पटेल (52) ने गांव में स्थित अलग-अलग पेड़ों से फांसी लगा ली है। सूचना पर वह मौके पर पहुंचे और दोनों के शव को नीचे उतारकर पंचनामा शुरू किया।

किसान ने की खुदकुशी

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि चर्तुभुज और उसका बेटा सरमन सुबह लगभग 9 बजे घर से खेत के निकले थे। खेत के पास ही उन दोनों में किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसके पहले कि कोई कुछ समझ पाता सरमन ने एक पेड़ से फांसी लगा ली। सरमन अपने पिता चर्तुभुज का एकलौता बेटा था। बेटे को फांसी पर लटका देखकर चर्तुभुज दुखी हो गया और उसने भी पास ही दूसरे पेड़ से फांसी लगा ली।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सरमन की मां से पूछताछ के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यह पता चल सकेगा कि दोनों ने यह कदम क्यों उठाया। दोनों में किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था या दोनों कर्ज को लेकर परेशान थे और रुपये की व्यवस्था नहीं होने के कारण विवाद होता था।

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