#Budget: किसान बोले बजट का लाभ नहीं मिलता,  कैसे सुधरेगी कृषि

 #Budget: किसान बोले बजट का लाभ नहीं मिलता,  कैसे सुधरेगी कृषि
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बुधवार को वित्तमंत्री अरूण जेटली ने लोकसभा में केन्द्र सरकार का आम बजट पेश किया। यह बजट इसलिए खास था क्योंकि इसे नोटबंदी के बाद पेश किया गया है। 

जबलपुर। बुधवार को वित्तमंत्री अरूण जेटली ने लोकसभा में केन्द्र सरकार का आम बजट पेश किया। यह बजट इसलिए खास था क्योंकि इसे नोटबंदी के बाद पेश किया गया है। नोटबंदी से परेशान हुई जनता को केन्द्र सरकार ने कई तोहफे दिए। कृषि जगत के लिए कई घोषणाएं की गई। इन घोषणाओं का जबलपुर पर क्या असर होगा जानते हैं आम लोगों की राय।

किसानों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ धरातल पर बहुत कम मिलता है, ऐसे में पूरे कृषि सेक्टर कि उत्थान कि बात बेमानी साबित होगी।



कृषि ऋण लक्ष्य को एक लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपए किया गया है। इससे किसानों को असानी से लोन सुविधा मिलेगी। कृषि स्तर में सुधार होगा।
- श्रीकांत पचौरी, कृषक

shrikant pachouri

वर्ष 2017-18 में फार्म लोन टारगेट नौ लाख करोड़ से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपए किया गया है। इससे किसानों को सुविधा और जीवन स्तर में सुधार के अवसर मिलेंगे।
- अजय उपाध्याय, कृषक


ajay upadhyay

भले ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 9 हजार करोड़, नाबार्ड के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। लेकिन इसका लाभ कम किसानों को ही मिल पाएगा। पूर्व में भी फसल बीमा योजना थी, जिसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता था।
- मनु नारला, किसान

manu narala

नाबार्ड के तहत सिंचाई के लिए आवंटित राशि 30 हजार करोड़ रुपए से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ कर दी गई है। इससे सिंचित क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होगी। जिसका सीधा लाभ किसान को मिलेगा।
- निर्भय सिंह, कृषक 

nirbhay singh

गांव में शौचालय बढ़ाने की बात वित्तमंत्री ने की है,लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे गांव हैं जहां पानी की सुविधा नहीं है। ऐसे में शौचालय कितने कारगर होते हैं? और लोग इनका उपयोग कितना होता है, यह देखने वाली बात होगी।
- कल्लूदास बैरागी, ग्रामीण

kallu das bairagi


नोटबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित किसान हुए थे। उनकी फसलों के भी सही दाम नहीं मिल रहे हैं। पिछले सीजन में सब्जियों के इतने दाम गिर गए कि किसानों को फसल नष्ट करनी पड़ी। ऐसे में कर्ज माफी की उम्मीद सरकार से थी, जो पूरी नहीं हुई।
- अजय राय, कृषक

ajay rai

एक करोड़ लोगों को पक्का घर देने की बात की गई है, 120 करोड़ की आबादी वाले देश में यह घोषणा ऊंट के मुंह में जीरा के समान है, अभी भी लोग झोपड़ी में रह रहे हैं। इसका लाभ गरीब को ही मिले इसमें भी संशय है।
- शहजाद खान रिजवी, कृषक

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