जिला अदालतों में नजर नहीं आएंगी फाइलें, दस्तावेज होंगे डिजिटल

२०१८ में डिजिटाइजेशन कार्य पूरा करने का लक्ष्य

By: sudarshan ahirwa

Published: 04 Jan 2018, 06:00 AM IST

जबलपुर. आने वाले साल में जिला अदालतों का कामकाज पेपरलेस हो जाएगा। जिला अदालतों में मुकदमे के साथ या उसकी सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की भारी-भरकम फाइलें नहीं बनेंगी। कोर्ट में पेश होते ही दस्तावेजों की पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फाइल (पीडीएफ) फार्मेट में कम्प्यूटराइज्ड सॉफ्ट कॉपी संरक्षित कर ली जाएगी। इसके लिए मप्र हाईकोर्ट द्वारा जारी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट डिजिटाइजेशन ऑफ रिकार्ड रूल्स २०१६ के प्रावधानों के तहत काम शुरू कर दिया गया है।

अब ये होगी प्रक्रिया
-व्यक्तिगत रूप से, अधिकृत व्यक्ति या वकील के जरिए प्रजेंटशेन सेंटर में अपना मुख्य केस, अंतवर्ती आवेदन या अन्य दस्तावेज उसकी सॉफ्ट कॉपी के साथ जमा किया जा सकेगा।
-सॉफ्ट कॉपी न होने की स्थिति में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को स्केन कर पीडीएफ फार्मेट में बदलकर संरक्षित व डिजिटलाइज किया जाएगा।
-दस्तावेजों की त्रुटियां, आकलन व इन्हें दूर करने के लिए दूसरे कार्यदिवस पर बुलाया जाएगा।
त्रुटियां दूर करने के बाद दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी को असंपादन योग्य स्वरूप में डिजिटलाइज किया जाएगा।

तीन माह बाद नहीं मिलेंगे रिकार्ड
डिजिटल फॉर्म में संरक्षित करने के एक माह बाद तक अगर इन्हें लेने कोई नहीं आता है तो सम्बंधित को ३ माह का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद भी दस्तावेज वापस नहीं लेने पर इन्हें जिला रजिस्ट्रार या सम्बंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा अधिकृत अधिकारी के निर्देशन में विनष्ट किया जाएगा। शैक्षणिक उपलब्धियों, सम्पत्ति में व्यक्तिगत अधिकार उत्पन्न करने वाले या स्वत्वाधिकार संबंधित दस्तावेजों को बारह साल तक डिजिटल फॉर्म में संरक्षित किया जाएगा। एेतिहासिक, समाजशास्त्रीय, वैज्ञानिक या कलात्मक मूल्य रखने वाले दस्तावेज स्थाई रूप से हमेशा के लिए संरक्षित किए जाएंगे।

कानूनों का आधार
हाईकोर्ट ने इन नियमों के लिए आईटी एक्ट २००० व इंडियन इविडेंस एक्ट १८७२ के प्रावधानों को आधार बनाया है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए मुकदमों के रिकाड्र्स का यूजर फे्रंडली डेटाबेस निर्माण, की-बोर्ड आधारित सर्चिंग व रिकॉर्ड का संरक्षण इन नियमों के निर्माण का उद्देश्य है। ये नियम जल्द ही लागू होंगे।

अदालतों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटलाइज किया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पूरी कोशिश है कि आने वाले साल में लक्ष्य पूरा कर सकें।
फहीम अनवर, रजिस्ट्रार जनरल, मप्र हाईकोर्ट

 

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