स्कूलों में फीस के नाम पर जेब काटने के ढूढें तरीके

स्कूलों में फीस के नाम पर जेब काटने के ढूढें तरीके
Find the way to pocketing the name of fees in schools

Mayank Kumar Sahu | Publish: Apr, 09 2019 10:35:41 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

निजी स्कूलों में फीस के नाम पर भी मोटी ‘कमाई’ तरह-तरह के मद बनाकर हो रही वसूली, अभिभावकों को ठगने के स्कूलों ने निकाले तरीके, ट्यूशन फीस के बाद अब एन्यूल और एग्जामिनेशन फीस का भी मद, तथाकथित स्कूल अभिभावकों की जेब पर डाल रहे डाका

जबलपुर।

स्कूलों ने फीस में कमाई के नाम पर अभिभावकों की जेब काटने के गजब के तरीके अपना रखे हैं। तथाकथित अंग्रेजी माध्यमों के स्कूलों ने अंधाधुंध कमाई के लिए स्कूलों में तरह-तरह की फीसों के मद बनाकर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। एक तरफ शिक्षा के व्यवसायीकरण और महंगी होती शिक्षा ने अभिभावकों की कमर तोड़ दी है। दूसरी ओर स्कूल फीस के नाम पर भी वसूली में लगे हैं। शहर के कई तथाकथित अंग्रेजी स्कूलों ने 10 से 20 फीसदी तक फीस में गुपचुप बढ़ोत्तरी कर दी है। साथ ही विभिन्न मद बनाकर वसूली कर रहे हैं। स्कूलों में हर साल की जाने वाली फीस बढ़ोतरी पर हर कोई आक्रोशित है, क्योंकि महंगाई और बेरोजगारी के दौर में गरीब परिवार अपने बच्चों को अच्छी और उच्चस्तरीय शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। स्कूलों की मनमानी के आगे हर कोई नतमस्तक है। हालात यह है कि शिक्षा, स्वास्थ्य के कारण घरों का बजट गड़बड़ा रहा है। अभिभावकों की मांग है कि फीस बढ़ोतरी पर सरकार, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग प्रभावी कार्रवाई कर निजात दिलाए।

अभिभावकों पर पैदा किया जाता है खौफ

स्टेट्स सिंबल बने इन स्कूलों ने अभिभावकों पर खौफ पैदा किया जा रहा है ताकि फीस को लेकर कोई आवाज न उठाए। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों के खिलाफ प्रशासन, शिक्षा विभाग की ठोस कार्रवाई न होने के कारण इनके हौसले हर साल बढ़ते जा रहे हैं। तरह-तरह की फीस के नाम पर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। फीस बढ़ोत्तरी में अभिभावकों की राय भी नहीं ली जाती है।

अब एन्यूअल और एग्जामिनेशन फीस

स्कूलों ने फीस के नाम पर कमाई के लिए नए मद बना लिए हैं। इसमें कुछ कतिथ स्कूलों द्वारा एन्यूअल फीस और एग्जामिनेशन फीस वसूली जाने लगी है। अभिभावकों द्वारा हर माह टयूशन फीस देने के बाद भी साल में एक बार वार्षिक फीस 2000 रुपए ली जा रही है। वहीं एग्जामिनेशन फीस के नाम पर 1000 रुपए वसूले जा रहे हैं।

स्कूल के खर्चे भी अभिभावकों के जेब से

स्कूलों ने वसूली के लिए अपनाए गए हथकंडे में स्कूल के खर्चों को भी अभिभावकों की जेब से फीस के रूप में वसूला जा रहा है। कुछ तथाकथित स्कूलों में मिसलेनियम फंड बना रखे हैं तो कुछ ने वेल्फेयर फंड बनाए हैं। इन फंडों के नाम पर स्कूलों द्वारा खुद के खर्चे की वसूली अभिभावकों की जेबों से की जा रही है।

फीस में देरी 10 रुपए पेनाल्टी

स्कूलों में फीस जमा करने की तिथि तय कर रखी है। कहीं माह की 5 तारीख तो कहीं 10 है। यदि निर्धारित तारीख पर कोई अभिभावक फीस जमा नहीं करता है तो 10 रुपए से लेकर 50 रुपए तक की पेनाल्टी मासिक लगाई गई है। कुछ स्कूल इसके एवज में प्रतिदिन के हिसाब से राशि वसूली करने में लगे हैं। सीबीएसई बोर्ड के साथ एमपीबोर्ड के स्कूल भी शामिल हैं।

-प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस, एडमीशन फीस, एग्जामिनेशन फीस जैसे मद बनाकर अपने तमाम खर्चे अभिभावकों से वसूल रहे हैं। जिन्हें वहन कर पाना अभिभावकों के लिए मुश्किल हो चला है। स्कूलों पर लगाम कसने के लिए जरूरी है कि एक नियम तय होना जरूरती है।

-सारिका राय, अभिभावक

-स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए सरकार गंभीर नहीं है। अब जरूरी हो गया है कि जल्द से जल्द फीस नियामक आयोग का गठन किया जाए। प्रशासनिक स्तर पर भी इस दिशा में पहल की जाए। इसके लिए लगातार आवाज उठाई जा रही है।

-मनीष शर्मा, अध्यक्ष अभिभावक संघ

-स्कूलों द्वारा पिछले सालों के दौरान बढ़ाई हुई फीस की भी जानकारी एकत्रित कराई जा रही है। स्कूलों की मनमानी की जांच करने के निर्देश टीम को दिए गए हैं।

-राजेश तिवारी, संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा

इन मदो के नाम पर वसूली

-स्कूल टयूशन फीस 1500-4500

-एन्यूअल फीस-500 से 2500

-एग्जामिनेशन फीस-500 से 2000

-लेट फीस-10 रुपए से 50 रुपए

-मैंटेनेंस फीस-200 से 500

-कम्प्यूटर फीस 300 से 2000

-लायबे्ररी फीस-250 से 400 रुपए

-स्पोर्टस फीस-100 से 300 रुपए

-स्कूल वेल्फेयर फंड फीस-100 से 400

-मिससिलेनियस फीस-400 से 800

 

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