ध्यानचंद को भारतरत्न का सम्मान दिलाने आगे आए युवा, करेंगे यह काम

ध्यानचंद को भारतरत्न का सम्मान दिलाने आगे आए युवा, करेंगे यह काम
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neeraj mishra | Publish: Jan, 16 2017 03:55:00 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

हाकी के जादूगर के रूप में हैं विश्वविख्यात,  सात साल से चला रहे हैं मुहिम

जबलपुर। हाकी के जादूगर के रूप में जाने जाते मेजर ध्यानचंद को भारतरत्न से सम्मानित करने की मांग सालों पुरानी है। जिन ध्यानंचद ने जर्मनी की ओर से खेलने के लिए तानाशाह हिटलर के हजारों प्रलोभनों को ठुकरा दिया था, उन्हीं की अपने ही देश में उपेक्षा की जा रही है। इस विश्वविख्यात खिलाड़ी को उनकी प्रतिष्ठा के मुताबिक सम्मान दिलाने के लिए नरसिंहपुर के युवा अभियान चला रहे हैं।


सात साल से चला रहे मुहिम

देश को हाकी में संसारभर में सिरमौर बनाने में मेजर ध्यानचंद का अहम योगदान था। फारवर्ड की पोजिशन पर खेलनेवाले ध्यानचंद को गोल करने में महारत हासिल थी। हाकी में उनकी बादशाहत को दुनियाभर में माना और सराहा गया। उन्हें देश-विदेश में कई सम्मान और पुरुस्कार मिले लेकिन देश के सर्वाेच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से वे अभी तक वंचित हैं। ध्यानचंद को भारत रत्न से सम्मानित करने की हाकी के फैन्स और खिलाड़ी लगातार मांग करते आ रहे हैं। इसके लिए नरसिंहपुर में कुछ युवाओं ने तो बाकायदा अभियान चला रखा है। हाकी के नेशनल प्लेयर राजकुमार चौबे ने देशभर के हाकी के राष्ट्रीय खिलाडिय़ों को इस संबंध में एकजुट भी किया। चौबे और उनके साथियों ने ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग के समर्थन में प्रदर्शन करने का सिलसिला 9 अगस्त 2010 को शुरु किया था।

पूरा करें आश्वासन

मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग के समर्थन में दो साल पहले भोपाल मेें 8 दिन का अनशन किया गया। तब भाजपा के कई बड़े नेताओं ने इस मांग का समर्थन किया था। चौबे बताते हैं कि ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद को भी कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने केंद्र में सरकार बनने पर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने का आश्वासन दिया था। अभी तक यह वादा पूरा नहीं किया गया है। नरसिंहपुर के युवा अब दोबारा अनशन करने की बात कर रहे हैं। 

दिलाई कई उपलब्धियां 

ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को हुआ था। वे 1926 से 1948 तक भारत की राष्ट्रीय हाकी टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान देश ने हाकी में अनेक अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किए। 1928, 1932, 1936 के लगातार तीन ओलंपिक गोल्ड मेडल जीते। पांच फीट सात इंच कद का यह खिलाड़ी किसी भी स्थिति में गोल करने में निष्णात था। 29 अगस्त को उनकी जयंती देशभर में खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है।  

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