27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के खिलाफ याचिका पर जवाब के लिए सरकार को मोहलत

27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के खिलाफ याचिका पर जवाब के लिए सरकार को मोहलत
हाई कोर्ट ऑर्डर

Prashant Gadgil | Updated: 13 Sep 2019, 08:43:57 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

अब दो सप्ताह बाद होगी सुनवाई

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी सेवा से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई की। पहले मामले में हाईकोर्ट ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन सहित अन्य को जवाब के लिए दो सप्ताह की मोहलत दे दी। शुक्रवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा व जस्टिस विशाल धगट की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश दिए। यूथ फॉर इक्वेलिटी संस्था, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे व प्रत्यूष द्विवेदी की ओर से याचिका दायर कर बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में दिए गए दिशानिर्देश के तहत किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मध्यप्रदेश में पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत 50 प्रतिशत आरक्षण लागू था। इसमें 20 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एससी और 14 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण का प्रावधान था। राज्य सरकार ने आठ मार्च 2019 को एक अध्यादेश जारी कर ओबीसी के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क दिया कि ओबीसी का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने से प्रदेश की शासकीय नौकरियों में आरक्षण की कुल सीमा बढकऱ 63 प्रतिशत हो गई है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। शुक्रवार को नागरिक उपभोक्ता मंच व अन्य की ओर से कोर्ट के निर्देश पर किया गया संशोधन पेश किया गया। सरकार की ओर से इसका जवाब पेश करने के लिए मोहलत मांगी गई।
असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति के लिए जारी चयनसूची पर रोक
उधर दूसरे मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्ति के लिए जारी एमपीपीएससी (मप्र लोक सेवा आयोग) की चयन सूची पर रोक लगा दी। एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा व जस्टिस विशाल धगट की डिवीजन बेंच ने एमपीपीएससी सहित अन्य को नोटिस जारी कर मामले में स्पष्टीकरण मांगा। दो सप्ताह का समय दिया गया। जबलपुर निवासी डॉ. ज्योति चौबे ने याचिका में कहा कि एमपीपीएससी की ओर से की जा रही सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में अनियमितता बरती जा रही है। सहायक प्राध्यापक ऑर्गेनिक कैमेस्ट्री का पद अनारक्षित महिला उम्मीदवार के लिए विज्ञापित था, इसके बावजूद अन्य पिछड़ा वर्ग की उम्मीदवार को चयनित कर लिया गया। याचिकाकता का नाम वरीयता सूची में सर्वप्रथम था। लेकिन, उसे चयन सूची में स्थान नहीं दिया गया। उसके स्थान पर अन्य पिछड़ा वर्ग की उम्मीदवार महजबीन अंसारी को चयनित कर लिया गया। जबकि, 26 जून 2019 को हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि आरक्षण के प्रावधानों का कठोरता से पालन किया जाए । इसे कोर्ट की अवमानना बताया गया। इसी सम्बंध में अन्य मामले में अधिवक्ता ब्रह्मानंद पांडे ने भी एमपीपीएससी पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए चयनसूची निरस्त कर फिर से जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उक्त चयन सूची को स्थगित कर पीएससी से जवाब-तलब किया।

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