मप्र के कैदी बनेंगे जेंटलमैन, 50 साल पुराना नियम बदलने जा रही सरकार

- 50 वर्ष पुराना जेल मैनुअल बदलेगा, नए ड्रेस में दिखेंगे कैदी
-एडीजी जेल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित
- तीन महीने में तैयार करनी है रिपोर्ट

By: Lalit kostha

Published: 19 Aug 2019, 12:23 PM IST

जबलपुर। मध्यप्रदेश में वर्ष 1968 से लागू जेल मैनुअल में बड़ी तब्दीली की कवायद चल रही है। सबसे बड़ा बदलाव कैदियों के ड्रेस को लेकर किया जा रहा है। अब कैदियों के सिर पर टोपी नहीं होगी। वहीं उन्हें मौसम के अनुसार तीन तरह के ड्रेस मिलेंगे। साथ ही जेल बिस्तर में भी बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए डीजी जेल ने एडीजी जेल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। सूत्रों के अनुसार जेल में बंद कैदियों की जो नई ड्रेस होगी, उसमें वे जेंटलमैन जैसे दिखेंगे, ताकि उन्हें अच्छा इंसान बनने की भावना जागृत हो।

 

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देश भर में 1894 का प्रिजऩ एक्ट और मप्र. की जेलों में 1968 में बने जेल मैनुअल के अनुसार कैदियों का ड्रेस निर्धारित है। जिसमें कैदियों को सफेद कुर्ता-पैजामा व एक टोपी दी जाती है। वहीं ठंड में हाफ जैकेट पहनने को दिया जाता है। जबकि, बिस्तर के तौर पर 12 वर्गफीट घेरे की दरी, चादर, कम्बल दिया जाता है। ठंड में बंदियों को काफी परेशानी होती है।

 

 

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जेल अधीक्षक ताम्रकार भी कमेटी के सदस्य
एडीजी जेल सुधीर कुमार शाही की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय टीम में जबलपुर ज़ोन के प्रभारी डीआईजी एवं सेंट्रल जेल के अधीक्षक गोपाल ताम्रकार भी शामिल हैं। ये कमेटी देश के अलग-अलग राज्यों में लागू ड्रेस कोड व बिस्तर आदि के बारे में जानकारी जुटा रही है। जेलर, कैदियों से सुझाव लिए जा रहे हैं।

कैदियों का जीवन स्तर सुधारने की कोशिश
जेल में कैदियों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य को देखते हुए ये कदम उठाए जा रहे हैं। अभी प्रदेश में बड़ी संख्या में जेल में कैदियों के बीमार व मौत की खबरें आती रहती हैं। इसकी एक बड़ी वजह जेल के अंदर का रहन-सहन भी बताया जाता है।


कैदियों को जेल में बेहतर सुविधा देने के मकसद से जेल मैनुअल में कुछ बदलाव किए जाने की कवायद चल रही है। इसमें कैदियों के ड्रेस कोड व बिस्तर के लिए डीजी जेल द्वारा पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
- गोपाल ताम्रकार, जेल अधीक्षक, जबलपुर

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Lalit kostha Desk
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