scriptGross negligence in Jabalpur regarding protection from Corona | कोरोना के नए वैरिएंट से बचाव को लेकर MP के इस शहर में घोर लापरवाही | Patrika News

कोरोना के नए वैरिएंट से बचाव को लेकर MP के इस शहर में घोर लापरवाही

-दुनिया कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन से लड़ने की तैयारी में, यहां पुराने वैरिएंट से ही बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं

जबलपुर

Published: December 02, 2021 12:43:48 pm

जबलपुर. कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन तेजी से पांव पसार रहा है। अब तक दुनिया के 23 देशों में ये फैल चुका है। भारत में भी इससे बचाव की तमाम कवायदतें शुरू हो चुकी हैं। लेकिन कोरोना को लेकर सबसे पहले सब कुछ अनलॉक करने वाले मध्य प्रदेश के जबलपुर में हालात ये है कि यहां अभी सारी तैयारी आधी-अधूरी ही दिखाई दे रही है। ओमीक्रोन तो दूर की बात डेल्टा व अन्य वैरिएंट से ही लड़ने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ये हाल तब है जब, पिछले नवंबर में ही 25 केस सामने आ चुके हैं। ये हाल तब है जब कोरोना के अब तक के लहर पर नजर डालें तो जबलपुर का रिकार्ड बेहतर नहीं है। फिर भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सुस्त बना है।
ओमीक्रोन
ओमीक्रोन
हाल ये है कि जिला अस्पताल में अब तक सीटी स्कैन मशीन का पता नहीं। उधर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक तक नहीं लग सका है। ये हाल तब है जब इस शहर के जिम्मे जबलपुर संभाग के अलावा विंध्य क्षेत्र सहित 25 जिलों के मरीजों का भी भार है।
वैसे कोरोना की दूसरी लहर के बाद प्रदेश सरकार के निर्देश पर जबलपुर में भी तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ऐसा प्रशासनिक बयानों में लगातार दावा किया जाता रहा। नित नई-नई योजनाएं बनती रहीं। लेकिन दूसरी लहर से निबटने के बाद जैसे ही संक्रमण दर कम हुआ स्वास्थ्य विभाग भी लापरवाह हो गया।
बता दें कि कोरोना की तीसरी लहर से निबटने के लिए जो योजना बनी थी उसके तहत मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक लगना था। जिला अस्पताल में 20 बेड का नया आइसीयू वार्ड बनना था। साथ ही सीटी स्कैन मशीन भी स्थापित की जानी थी। ये दोनों ही कार्य वर्तमान में अधूरे हैं। जिला अस्पताल में फिलहाल आईसीयू के 15 बेड ही हैं, जबकि अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए सिर्फ कमरा ही बना है। मशीन अभी आनी है। आइसीयू वार्ड तैयार है, लेकिन अभी लोक निर्माण विभाग से हैंडओवर नहीं हुआ है। उधर मेडिकल कॉलेज में दो नए ऑक्सीजन स्टोरेज कैप्सूल टैंक लगाने के नाम पर अभी केवल आधार ही बनाया जा सका है। टैंक अब तक यहां पहुंचा भी नहीं है।

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