Be my valentine: रोज मिलते थे, वर्षो बाद किया प्यार का इजहार, देखें वीडियो

फिल्मों जैसी है कीर्ति और ऋषभ के प्यार की कहानी, जो कभी पसंद ही नहीं था, वही बना जीवन का साथी

By: Premshankar Tiwari

Updated: 08 Feb 2018, 08:19 PM IST

जबलपुर। प्यार भी अजब चीज है, जब होता है तो सारे बंधन तोड़ देता है। नापसंद को भी इतने नजदीक ला देता है कि वह जीवन का एक हिस्सा बन जाता है। उसके बिना पल काटना भी मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है संगीत शिक्षक ऋषभ और कीर्ति की। कभी कीर्ति को ऋषभ का मजाकिया अंदाज आंखों को खटकता था। वह उन्हें पसंद ही नहीं करती थीं। वक्त ने ऐसा मोड़ लाया कि बाद में ऋषभ और कीर्ति एक-दूसरे की आंखों में बस गए। एक-दूजे के लिए वक्त काटना मुश्किल हो गया, फिर क्या... सात फेरों की रस्म के साथ इन्होंने सदा नजदीक रहने का फैसला किया और अब खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

प्यार का संगीत
संगीत शिक्षक ऋषभ श्रीवास्तव और शिक्षिका कीर्ति श्रीवास्तव की प्यार की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। यूं कहें कि संगीत ने ही उनके जीवन में प्यार के रंग भर दिए। दोनों की प्रेम कहानी कुछ ऐसी है कि कीर्ति भातखंडे संगीत महाविद्यालय में संगीत सीखने जाती थीं और वहीं पर ऋषभ का भी आना होता था। कीर्ति को ऋषभ का मजाकिया स्वभाव पसंद नहीं था, लेकिन एक वक्त ऐसा आया कि दोनों अच्छे दोस्त बन गए और दोस्ती भी ऐसी हुई कि रोजाना मिलना जरूरी हो गया था। संगीत ने एक-दूसरे के प्रति ऐसा आकर्षण जगाया वे रोज मिलने लगे। एक-दूसरे को देखे बिना दिन ही सूना लगने लगा।

जेहन में आया ये सवाल
ऋषभ के अनुसार वह और कीर्ति रोजाना सिविक सेंटर एरिया के एक कॉफी शॉप में रोजाना 10 से 15 मिनट के लिए मिलते थे। धीरे-धीरे दिन बीतते गए। कीर्ति के पिता उनके लिए लड़का देख रहे थे। इन सबके दौरान कीर्ति और ऋषभ दोनों ने यह सोचा कि हम दोनों में यदि केवल दोस्ती का ही रिश्ता है, तो हम इस तरह रोजाना क्यों मिलते हैं? ऐसा कोई दिन क्यों नहीं बितता है कि हम ना मिलें। खुद से सवाल किया तब समझ आया कि दोस्ती के रिश्ते से बढ़कर भी उनमें रिश्ता है। फिर दोनों ने तय कर लिया कि वह एक-दूसरे से शादी करेंगे।

सोचा नहीं था कि एक साथ होंगे
ऋषभ बताते हैं कि हमने अपनी लाइफ में कभी नहीं सोचा था कि हमारे बीच कभी पति-पत्नी का रिश्ता होगा, क्योंकि कीर्ति उन्हें पसंद नहीं करती थी। इंटरकास्ट होने की वजह से पारिवारिक बाधाएं भी तय थीं, जो सामने भी आयीं। हालांकि दोनों ने एक होने का जो दृढ़ निश्चय किया था, उसे पूरा किया। प्यार को निभाते हुए सन 2006 में दोनों ने शादी कर ली। कीर्ति ने बताया कि प्यार के बंधन में बंधने के बाद उन्होंने एक सीख भी मिली कि बिना किसी को स्वभाव को जाने किसी के बारे में कोई राय नहीं बनानी चाहिए। कीर्ति व ऋषभ कहते हैं दोनों के बीच आज भी पहले जैसा वही प्यार है। वे एक-दूसरे का खयाल रखते हैं। जीवन की बगिया खुशहाल है।

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Premshankar Tiwari Desk
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