यहां तो विकास के नाम पर दिया जा रहा धोखा

जबलपुर में कुछ प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुए, बाकी कब पूरे होंगे पता नहीं

By: shyam bihari

Published: 01 Mar 2021, 09:46 PM IST

 

जबलपुर। विकास के नाम पर जबलुपर शहर में हर साल तमाम प्रोजेक्ट शुरू करने का दावा किया जाता है। नेता, अफसर हर बार कहते हैं कि विकास कार्यो को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। लेकिन, शहर की हालत देखकर कोई भी कह सकता है कि विकाय कार्यों के Óयादातर प्रोजेक्ट बुरे हाल में हैं। कुछ प्रोजेक्ट तो वर्षों बाद भी शुरू ही नहीं हो पाते। कुछ शुरू हुए, तो उनकी काम की गति इतनी धीमी है कि शायद ही किसी को पता हो कि वे पूरे कब होंगे? प्रदेश सरकार दो मार्च को बजट पेश करेगी। इसे लेकर शहरवासियों का कहना है कि विकास के नाम पर हर बार छलावा हुआ है। सरकार के नुमाइंदे यहां आकर वादे तो खूब करते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने में लम्बा वक्त लगा देते हैं। आलम यह है कि विकास कार्यों के लोकार्पण के दौरान पता चलता है कि उसे कई साल पहले स्वीकृति मिली थी। प्रदेश के इस बार के बजट से भी शहर का आम आदमी कुछ न कुछ सौगात मिलने की उम्मीद कर रहा है। यदि कोई कार्य बजट के अभाव में रुका है, तो उसे इस बजट में पर्याप्त राशि दी जाए। जिले में औद्योगिक क्षेत्र खाली पड़े हैं। नई इंडस्ट्री को प्रोत्साहित किया जाए। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए प्रोत्साहन नीति की घोषणा की जाए। शहर की टै्रफिक व्यवस्था सुधारने के लिए पुख्ता योजना बनाई जाए।

ये काम अधूरे
- भटौली में 50 हेक्टेयर में टेक्सटाइल्स पार्क की स्थापना की घोषणा की गई थी। अभी तक एमपीआइडीसी को जमीन भी आवंटित नहीं हुई।
- सरकार ने इंदौर और भोपाल की तर्ज पर जबलपुर में भी मेट्रो रेल सेवा शुरू करने के लिए सर्वे टीम को जबलपुर भेजने की घोषणा की थी। अभी तक टीम के अधिकारी जबलपुर नहीं पहुंचे।
- ग्वारीघाट में बड़े आयोजनों के दौरान जाम लगता है। इसके समाधन के लिए शंकराचार्य चौक से ग्वारीघाट रामलला मंदिर तक रेलवे की भूमि का हस्तांतरण कर ग्रीन ट्रांजिट कॉरीडोर बनाने की योजना कागजों से बाहर नहीं निकली है।
- विजय नगर में स्थापित कृषि उपज मंडी अब शहर के बीच में आ गई है। इसके पास ही आइएसबीटी है। ऐसे में बस और मंडी में माल के लिए आने-जाने वाले ट्रकों से जाम लगता है। अभी तक मंडी को स्थानांतरित नहीं किया जा सका है।
- सीएम राइज स्कूल के तहत 186 स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। जिला स्तर पर सूची बनाकर शासन को भेज दी गई, लेकिन अब तक रूपरेखा तय नहीं हुई है।
- शहपुरा, चरगवां में शासकीय कॉलेज और विजय नगर में महिला कॉलेज खोलने की घोषणा की गई थी। इस दिशा में अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

shyam bihari Desk
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