हाईटेक हुए किसान, अब ऐप से धान खरीदी का पंजीयन

जबलपुर में भी कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसान अपनी उपज के पंजीयन में भी नई तकनीकों का करने लगे हैं इस्तेमाल

 

 

By: shyam bihari

Published: 11 Oct 2021, 07:40 PM IST

 

यह है स्थिति
- जिले में 73 केंद्रों पर हो रहा है पंजीयन।
- 14 अक्टूबर है पंजीयन की अंतिम तिथि।
- अब तक करीब 40 हजार किसान पंजीकृत।
- 34 हजार 400 पुराने व 5 हजार 245 नए किसान।
- 91 हजार 561 हेक्टेयर दर्ज हो चुका है रकबा।
- रजिस्टे्रशन सेंटर पर 37 हजार 760 पंजीयन।
- 2 हजार से अधिक पंजीयन किसान मोबाइल एप पर।

कहां कितना पंजीयन

तहसील-कुल पंजीयन-रकबा
मझौली 9554 21585
पाटन 7723 18932
सिहोरा 8445 15358
पनागर 6020 14564
शहपुरा 3808 8936
जबलपुर 3295 6789
कुंडम 1303 2882
गोरखपुर 542 1312
अधारताल 276 797
रांझी 158 402
(नोट : रकबा हेक्टेयर में)

जबलपुर। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसान अपनी उपज के पंजीयन में भी नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से करने लगा है। जिले में अभी धान खरीदी का पंजीयन हो रहा है। इसमें सोसायटी के द्वारा रजिस्टे्रशन सेंटर के अलावा घर बैठे मोबाइल एप के जरिए भी इस प्रक्रिया को पूरा कर रहा है। ऐसे किसानों की संख्या करीब 2 हजार है। पहले 12 से 15 सौ किसान इसका उपयोग करते थे। अभी तक जिले में 39 हजार 650 किसान पंजीयन करवा चुके हैं। कोरोना के कारण समाज एवं देश में कई तरह के बदलाव आए हैं। तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है।

जिले में एमपी किसान ऐप भी इसका उदाहरण बन रहा है। हालांकि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने में प्रशासन पीछे रहता है। जबकि इसके लिए ई-गवर्नेस के अलावा कृषि विभाग का मैदान अमला भी उपलब्ध है। वे किसानों को इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं। इससे कम से कम उन्हें घर बैठे पंजीयन की सुविधा मिल जाएगी। साथ ही पंजीयन केंद्रों पर भीड़ भी नहीं बढेग़ी। पंजीयन में इस बार दो तरीके ही शासन ने किसानों को उपलब्ध कराए हैं। इनमें एक सीधे सोसायटी के पंजीयन केंद्र से रजिस्टे्रशन करवा सकते हैं जबकि दूसरा तरीका एमपी किसान एप है। जबकि पिछले साल ई-उपार्जन एप के अलावा ऑनलाइन सेंटरों पर यह काम होता था। इसलिए किसान एप पर पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या में इजाफा हुआ है। यह पिछले साले के मुकाबले दोगुनी है।
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी आशीष शुक्ला ने कहा कि जिले में धान का पंजीयन तेज हो चुका है। सोसायटी के केंद्रों के अलावा कि सान एप में पंजीयन के लिए किसानों का रुझान बढ़ रहा है। यह आसान होने के साथ-साथ सुविधाजनक भी है।

shyam bihari Desk
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