हाईकोर्ट ने पूछा, तकनीकी पदों पर गैर तकनीकी कैसे ?

परिवहन विभाग में नियुक्तियों का मामला, कहा-बताओ नहीं तो पीएस को आना होगा

 

By: reetesh pyasi

Published: 04 Jan 2018, 06:00 AM IST

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के परिवहन विभाग के रवैये पर असंतोष जाहिर किया है। कोर्ट के परिवहन विभाग प्रमुख सचिव को यह स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है कि किन नियमों के तहत परिवहन निरीक्षक व उपनिरीक्षकों के तकनीकी पदों पर गैर तकनीकी लोगों की नियुक्ति की जा रही है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने परिवहन विभाग सचिव को चेतावनी दी है कि आगामी सुनवाई तक जवाब नहीं आया, तो उन्हें अगली सुनवाई पर स्वयं उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

यह है मामला
जबलपुर के आनंद नगर, अधारताल निवासी समाजसेवी ज्ञानप्रकाश ने 2015 में यह जनहित याचिका दायर की थी, इसमें कहा गया था कि 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भारी वाहनों विशेषत: ट्रकों में ओवर लोडिंग सख्ती से बंद कराने के निर्देश दिए थे। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुको के आदेश का पालन करने के लिए कहा। जुलाई 2005 में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि ओवर लोडिंग रोकने के लिए परिवहन विभाग में भर्तियां की जाएंगीं। याचिकाकर्ता ने खुद अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि इसके बाद सरकार ने व्यापमं के जरिए परिवहन विभाग में निरीक्षकों व उपनिरीक्षकों के पदों पर गैर तकनीकी लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आरंभ कर दी। याचिका में इस प्रक्रिया व इसके तहत भर्तियों को अवैध बताया गया।

एमपीएमवीआर में नहीं है प्रावधान
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने इसके लिए भर्ती नियमों में संशोधन कर मोटर व्हीकल निरीक्षक व मोटर व्हीकल उपनिरीक्षक के पद सृजित कर लिए, जबकि एमपी मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 213 में स्पष्ट रूप से परिवहन उपनिरीक्षक व निरीक्षक से लेकर परिवहन आयुक्त तक का पद तकनीकी बताया गया है। इन पदों पर विशेष तकनीकी डिप्लोमाधारी ही नियुक्त किए जा सकते हैं। गत 31 जुलाई को कोर्ट ने परिवहन विभाग प्रमुख सचिव से पूछा था कि एमपीएमवीआर के तहत तकनीकी पदों पर गैर तकनीकी लोगों की नियुक्ति का क्या प्रावधान है? जवाब पेश न करने पर बुधवार को कोर्ट ने परिवहन सचिव को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने उन्हें चेताया कि आगामी सुनवाई तक उनका जवाब नहीं मिला तो 12 फरवरी को स्वयं खंडपीठ के समक्ष हाजिर होना पड़ेगा। राज्य सरकार का पक्ष उप महाधिवक्ता संजय द्विवेदी ने रखा।

reetesh pyasi Desk
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