हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 45 साल की उम्र पार कर चुके उम्मीदवार भी दे सकेंगे एडीजे की परीक्षा

हाईकोर्ट ने कहा सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किए जाएं रिजल्ट

By: Premshankar Tiwari

Published: 24 May 2018, 09:58 PM IST

जबलपुर। न्यायिक व्यवस्था की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। युवाओं की तमन्ना है कि वे भी अच्छे जज बनकर न्यायिक व्यवस्था में अपना योगदान दें। इस फील्ड में जाने के इच्छुक प्रौढ़ पात्रों के लिए भी एक और अच्छी खबर है। दरअसल मप्र हाईकोर्ट ने 45 साल आयु पूरी कर चुके मप्र उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट की अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि पैतालिस की उम्र पार कर चुके याचिकाकर्ता उम्मीदवारों को भी 1 जुलाई 2018 को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किया जाए। जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस जेपी गुप्ता की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिए कि इनके परीक्षा परिणाम सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किए जाएं।

अचानक बदला था नियम
जबलपुर निवासी देवेंद्र शुक्ला, दिल्ली निवासी विक्रम सिंह व अन्य 15 अन्य उम्मीदवारों ने ये याचिकाएं दायर कर मप्र उच्च न्यायिक सेवा नियम 2017 में वर्णित आयु सीमा में छूट देने का आग्रह किया था। कहा गया था कि पहले एडीजे पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 48 वर्ष थी। जिसे अचानक घटाकर 45 साल कर दिया गया, जबकि याचिकाकर्ता 48 साल को अधिकतम मानकर प्रवेश परीक्षा व इंटरव्यू की तैयारियों में जुटे हैं। अचानक नियम तब्दील करने से उनकी तैयारियों के साथ भविष्य को लेकर भी आघात पहुंचा है।

सुको भी दे चुका है अनुमति
याचिकाकर्र्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र तिवारी, पराग एस चतुर्वेदी, मनीष अंगिरा ने कोर्ट को बताया गया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने भी लंबित है। समान परिस्थिति वाले उम्मीदवारों को सुको ने प्रारंभिक परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए है। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच भी 17 मई 2018 को इसी आशय का आदेश जारी कर चुकी है। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया था कि महज परीक्षा में बैठने से याचिकाकर्ताओं का उक्त पद के लिए कोई दावा या अधिकार नहीं बनता। इस पर गुरुवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत के आदेश दिए हैं।

Premshankar Tiwari Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned