हाईकोर्ट का निर्देश- दो माह में रिटायर्ड सीनियर सिटीजन की शिकायत का करो निदान

दोबारा रिकवरी का मामला

By: reetesh pyasi

Published: 08 Dec 2019, 08:27 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने रिटायर्ड सीनियर सिटीजन की उस शिकायत पर गम्भीरता दिखाई, जिसमें एक बार वसूली गई राशि फिर से वसूलने का आरोप लगाया गया। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने सरकार को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की शिकायत का 60 दिन के भीतर निराकरण कर दिया जाए।

यह था मामला
सिविल लाइंस, जबलपुर निवासी 66 वर्षीय सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी मुन्नीबाई बागड़े की ओर से याचिका दायर की गई। वह एसपी ऑफिस जबलपुर में भृत्य थी व 2015 में सेवानिवृत्त हुई। सेवाकाल में ही उससे अधिक भुगतान कर दी गई दो लाख 31 हजार 740 रुपए की रिकवरी कर ली गई थी। इसके बावजूद नए सिरे से उक्त रकम की रिकवरी काप आदेश जारी कर दिया गया। अधिवक्ता सचिन पांडे ने तर्क दिया कि जब रिकवरी की गई थी, तब उसे कोई विवरण नहीं सौंपा गया था। इसीलिए उसकी अज्ञानता का फायदा उठाकर दोबारा रिकवरी अनुचित है। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का 60 दिन के भीतर निराकरण करने का निर्देश दिया।

पत्नी को भरण-पोषण के लिए हर माह तीन हजार रुपए दो
कुटुम्ब न्यायालय ने मानेगांव रांझी निवासी युवक को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी को भरण-पोषण के लिए तीन हजार रुपए प्रतिमाह अदा करे। प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश आरपी मिश्रा की अदालत ने यह आदेश दिया। रांझी निवासी गायत्री सुनवाहा की ओर से कहा गया कि उसका विवाह हिन्दू रीति-रिवाज से 14 फरवरी 2005 को रमेश कुमार सुनवाहा के साथ हुआ था। संतान न होने के कारण रमेश ने नवम्बर 2007 में निर्मला वंशकार नामक महिला से दूसरा विवाह कर लिया, जिससे एक पुत्र है। विवाह के एक साल बाद से ही अनावेदक गाली-गलौज के अलावा मारपीट भी करता था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भरण-पोषण प्रदान किए जाने का आदेश दिया।

reetesh pyasi Desk
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