MP high court ने पूछा- जेल में महिला व मानसिक रोगी बंदियों की हालत सुधारने क्या उठाए कदम

MP high court ने पूछा- जेल में महिला व मानसिक रोगी बंदियों की हालत सुधारने क्या उठाए कदम

deepankar roy | Publish: Dec, 07 2017 11:38:11 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

राज्य सरकार से मांगा प्रगति प्रतिवेदन, एक सप्ताह का दिया समय

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में बुधवार को जेल में निरुद्ध महिला बंदियों और मानसिक रोगियों के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जेल में निरुद्ध महिला बंदियों, विशेषत: मानसिक रोगियों के हालात सुधारने के लिए कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति के सुझावों के परिपालन में क्या कार्रवाई की गई? चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने मामले को एक अन्य जनहित याचिका से लिंक कर दिया। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह में प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया
जनवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मप्र हाईकोर्ट ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर याचिका दायर की। इसकी सुनवाई के दौरान महिला बंदियों के साथ ही प्रदेश की जेलों में निरुद्ध सभी विचाराधीन व सजायाफ्ता बंदियों की दशा सुधारने के लिए जुलाई 2016 में एक समिति गठित की गई थी। समिति ने बैठक कर कई बिंदुओं पर अपने सुझाव पेश किए थे।

छह माह में एक बार बैठक
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राघवेंद्र कुमार ने पूर्व सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि समिति गठन के छह महीने बाद इसकी महज एक बैठक ही हो सकी है, जबकि हर तीन माह में समिति को बैठक करनी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार जेलों में अशासकीय संदर्शक की नियुक्ति भी नहीं की गई है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि समिति की बैठक के सुझावों पर कहां तक अमल हुआ। बुधवार को फिर सरकार की ओर कोर्ट से इन सवालों का जवाब देने के लिए समय देने का आग्रह किया गया।

छोटे बच्चों की दशा खराब
हरदा जिले की सामाजिक कार्यकर्ता शमीम मोदी ने 2009 में यह जनहित याचिका दायर की थी, इसमें कहा गया है कि प्रदेश की विभिन्न जेलों में निरुद्ध विचाराधीन व सजायाफ्ता महिला बंदियों की हालत ठीक नहीं है। उन्हें तमाम असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। उनके साथ रहने वाले छोटे बच्चों की दशा भी मानवोचित नहीं है।

 

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