हिन्दी में आवेदन भरा तो उम्मीदवार को साक्षात्कार के लिए किया अयोग्य

इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई (आईबीपीएस) को हाईकोर्ट का नोटिस, कोर्ट ने
कहा, याचिकाकर्ता के लिए रिक्त रखें एक पद

By: Manish garg

Published: 29 Mar 2019, 11:12 PM IST

जबलपुर
बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई (आईबीपीएस) ने एक उम्मीदवार की दावेदारी केवल इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उसने आवेदन हिन्दी में दिया था। आवेदक को साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल नहीं होने दिया। याचिकाकर्ता ने इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई के इस आदेश को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाइकोर्ट ने इस मामले को बहुत ही संजीदगी से लिया। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई (आईबीपीएस) को निर्देशित किया है कि राजभाषा अधिकारी के पद के इंटरव्यू से वंचित युवक के लिए एक पद रिक्त रखा जाए।
चार सप्ताह में मांगा जवाब-
हाईकोर्ट ने इस आईबीपीएस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब-तलब किया है। याचिका की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।
प्री एग्जाम किया क्वालीफाई-
याचिकाकर्ता मंडला निवासी नितिन वासनिक की ओर से कहा गया कि इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन मुंबई द्वारा दिसंबर 2018 में राजभाषा अधिकारी के पद की प्री-एग्जाम आयोजित किया गया था। प्री-एग्जाम उत्तीर्ण करने के बाद उसने 27 जनवरी 2018 को मेन्स एग्जाम भी उत्तीर्ण कर लिया। इसके बाद 27 फरवरी को उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। उसे कहकर इंटरव्यू में शामिल होने से रोक दिया गया कि उसने अपना आवेदन-पत्र हिन्दी में भरा था।
राजभाषा अधिकारी पद के लिए आवेदन
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता केएल प्रजापति ने तर्क दिया कि आवेदक ने राजभाषा अधिकारी के पद के लिए आवेदन किया था। याचिकाकर्ता को केवल हिन्दी में आवेदन पत्र भरने के आधार पर इंटरव्यू के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है। प्रांरभिक सुनवाई के बाद एकल पीठ ने आईबीपीएस को याचिकाकर्ता के लिए एक पद रिक्त रखने का निर्देश दिया है।

 

Manish garg
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