खटुआ हत्याकांड : आरोपी विजिलेंस अधिकारी को अंतरिम सुरक्षा देने से हाईकोर्ट का इंकार

याचिका की निरस्त

By: prashant gadgil

Published: 03 Jan 2020, 08:25 PM IST

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने धनुष तोप बेयरिंग मामले से जुड़े बहुचर्चित खटुआ हत्याकांड में आरोपी बनाए गए जबलपुर में 6 साल तक पदस्थ रहे अधिकारी कमल कुमार चित्तोर क ो गिरफ्तारी व अन्य सख्त कार्रवाई के प्रति अंतरिम सुरक्षा देने से इंकार कर दिया। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने चित्तोर की याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि केस डायरी उपलब्ध न होने की दशा में यह अंतरिम सुरक्षा देने के योग्य मामला नहीं है।
धनुष तोप बेयरिंग मामले का भी है आरोपी
वर्तमान में ऑफिस ऑफ आर्मर्ड व्हीकल हैडक्वार्टर चेन्नई में डायरेक्टर विजिलेंस के पद पर पदस्थ कमल कमार चित्तोर ने याचिका में कहा कि वे 3 जून 2009 से 4 जुलाई 2015 तक जबलपुर में पदस्थ थे। शारदा चरण खटुआ (अब स्वर्गीय) उनके ही अधीन जूनियर वक्र्स मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। धनुष तोप में जर्मनी के बजाए चीन में बनी बेयरिंग के इस्तेमाल होने का खुलासा होने पर सीबीआई ने एक एफआईआर 19 जुलाई 2017 को जीसीएफ के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की थी। 14 जून 2018 को जीसीएफ के 16 अधिकारियों को सीबीआई ने नोटिस जारी किए थे और उनमें से वे भी एक थे। उनके ही बयानों के आधार पर सीबीआई ने मृतक शारदा चरण खटुआ को भी मामले में आरोपी बनाया था।
घमापुर पुलिस कर रही पूछताछ
17 जनवरी 2019 को खटुआ लापता हो गया। ५ फरवरी २०१९ को घमापुर थानांतर्गत जीसीएफ पंप हाउस के पास शारदा चरण खटुआ की लाश बरामद हुई। याचिका में कहा गया कि 5 दिसंबर 2019 को घमापुर थाना पुलिस ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर तलब किया। चेन्नई में संवेदनशील पद पर पदस्थ रहने के बाद भी वे 6 दिसंबर को जबलपुर पहुंचे और उन्होंने पुलिस को अपने बयान दर्ज कराए। इसके बावजूद उन्हें अपनी गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है। जबकि वे पुलिस की हरसंभव मदद करने के लिए तैयार हैं। एेसे में उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने आवेदक को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत उपलब्ध उपचारों का उपयोग करने की छूट देकर याचिका खारिज कर दी।

prashant gadgil Desk
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