59 विभाग होंगे हाईटेक, नहीं अटकेगी फाइल

ई-ऑफिस के तहत ऑनलाइन होगा काम, जिले में शुरू हो गया ट्रायल

 

By: gyani rajak

Updated: 08 Dec 2019, 12:54 PM IST

जबलपुर . प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार के लिए एक जनवरी से लागू होने वाली ई-ऑफिस योजना का ट्रायल जिले में शुरू हो गया है। नई व्यवस्था के लिए शासन के 59 विभागों के कर्मचारियों को टे्रनिंग के साथ टेस्टिंग यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए गए हैं। इस प्रणाली के तहत विभागों की नोटशीट ऑनलाइन रहेगी। कोई भी इसे पूरा करने में आनाकानी नही कर सकेगा। कुछ विभागों के कर्मचारियों ने ट्रायल के तौर पर इसमें फाइल को ऑनलाइन किया है।

अभी तक यह होता है कि कुछ नोटशीट अधिकारियों की टेबल पर पड़ी रहती है। कई ऐसे आदेश होते हैं जिन्हें उस परिसर में पहुंचने में हफ्तों लग जाते हैं। इलेक्ट्रानिक (ई) ऑफिस प्रणाली में इस पर अंकुश लग सकेगा। इसमें पेपरलेस काम होगा। इससे पर्यावरण को भी फायदा होगा। इस प्रक्रिया में सभी जरूरी फाइलों को स्कैन कर ऑनलाइन किया जाएगा। कौन सी फाइल कहां तक पहुंची। अधिकारी ने उसके समाधान के लिए क्या किया, यह तमाम प्रकार की जानकारियां ऑनलाइन होंगी। यही नहीं वरिष्ठ अधिकारी जब कोई फाइल भेजेंगे तो संबंधित स्टाफ के पास ईमेल और मोबाइल फोन पर उसका अलर्ट मैसेज भी आएगा।

अधिकारी भी सीखेंगे ई-ऑफिस

कर्मचारी और स्टाफ के अलावा अब जिले के प्रमुख अधिकारियों को इसकी जानकारी टे्रनिंग के माध्यम से दी जाएगी। एनआईसी ने इसका कार्यक्रम भी तैयार किया है। इसमें करीब 150 अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। उन्हें ई-ऑफिस प्रणाली की योजना, फीचर और उसकी उपयोगिता की जानकारी दी जाएगी।

फाइल संबंधी काम होगा आसान

ई-ऑफिस के जरिए फाइल संबंधी काम आसान हो सकेगा। अक्सर यह होता है कि कोई अधिकरी छुट्टी पर है तो फाइल आगे नहीं बढ़ती। लेकिन इस प्रणाली में शामिल होने के बाद वे कहीं भी रहें, अपने मोबाइल और लैपटॉप पर इसे खोलकर समाधान कर सकेंगे। इसके जरिए पुरानी फाइल को भी आसानी से ढूंढ़ा जा सकेगा।

e-office

 

फैक्ट फाइल

- 59 से ज्यादा विभागों को किया गया है शामिल।

- 900 में 450 से ज्यादा कर्मचारियों को टे्रनिंग।

- 350 से ज्यादा कर्मियों को मिल चुकी ईमेल आइडी।

- 150 अधिकारी भी सीखेंगे ई-ऑफिस पर काम।

विभागों ने मांगे हैं कम्प्यूटर-स्कैनर

इस प्रणाली को शुरू करने के लिए हार्डवेयर संबंधी जरुरतें भी आकलित की गई हैं। इसके लिए विभागों से जानकारी मांगी गई है। 900 कर्मचारियों में से सिर्फ 150 के पास तय मानक वाले स्कैनर हैं। 300 कर्मचारियों के पास उच्च क्षमता वाले कम्प्यूटर हैं। 600 कर्मचारियों के पास नहीं है। ई-ऑफिस प्रणाली में काम करने वाले करीब 550 को कम्प्यूटर संबंधी ज्ञान है। इसलिए उनमें से अधिकांश को टे्रनिंग भी दी गई है।

 

 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट हो चुका है हाइटेक

मप्र हाईकोर्ट हाईटेक तरीके से पक्षकारों, वकीलों को उनके मामलों की तारीख, वर्तमान स्थिति, कोर्ट के आदेश ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। मुकदमों की लिस्टिंग पूरी तरह स्वचालित सॉफ्टवेयर से की जाने लगी है। मामले की तारीख पक्षकारों, संबंधित वकीलों को ई-सेवा के जरिए ई-मेल और उनके मोबाइल फोन पर मैसेज के जरिए भी पहुंच रही है। पेपरलेस कोर्ट बनने की दिशा में मप्र हाईकोर्ट अभी तक निर्णीत व लंबित मामलों के सभी दस्तावेजों को स्कैन करा रहा है। करीब 7 करोड़ पृष्ठों में से 5 करोड़ पृष्ठ स्कैन हो चुके हैं। स्कैनिंग के बाद इन्हें माईक्रो फिल्म में संरक्षित किया जाएगा। हाईकोर्ट के हाईटेक होने के चलते प्रतिदिन कॉज लिस्ट, आवश्यक पत्राचार में लगने वाले कागज की बड़े पैमाने पर बचत हो रही है।

जिला चिकित्सालय

अस्पताल कार्यालय को पेपरलैस बनाने की कवायद शुरू हो गई है। डॉक्टर्स को कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विभागीय कामकाज से संबंधित नोटशीट डॉक्टर्स की टेबिल से गायब हो जाएंगी। बीमारियों, मरीजों का डाटा सहित अन्य प्रशासकीय कार्य कम्प्यूटर पर होंगे। ये व्यवस्था अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगी।
अस्पताल में ओपीडी से लेकर वार्ड तक फिलहाल मरीजों की जांच रिपोर्ट से लेकर प्रिस्क्रिप्शन तक सब कुछ पर्चे पर है।

ई-ऑफिस योजना एक जनवरी से शुरू होनी है। इसके लिए कर्मचारियों को टे्रनिंग दी जा चुकी है। इस पर काम के अभ्यास के लिए टेस्टिंग यूजर आईडी भी प्रदान की गई है। अधिकारियों को भी इसकी जानकारी देने योजना बनाई है।

आशीष शुक्ला , जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी

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