High court : वकीलों के कोटे में न्यायिक अधिकारियों की भर्ती क्यों हो रही है

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्यपीठ ने हाईकोर्ट प्रशासन को जारी नोटिस में पूछा

By: praveen chaturvedi

Published: 19 Mar 2020, 06:04 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट की मुख्यपीठ ने हाईकोर्ट प्रशासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि मप्र उच्च न्यायिक सेवा में वकीलों के लिए आरक्षित पदों पर न्यायिक सेवा के अधिकारियों को क्यों भर्ती किया जा रहा है? चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस वीके शुक्ला की डिवीजन बेंच ने अनावेदक से जवाब-तलब किया।

जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि मप्र उच्च न्यायिक सेवा की भर्ती में 75 फीसदी पद सेवारत न्यायिक अधिकारियों के लिए और 25 फीसदी पद वकीलों से भरे जाने हैं। लेकिन सेवा नियम 2017 के नियम 5 (1) (डी) के परंतुक के तहत व्यवस्था की गई है कि वकीलों के 25 फीसदी पद किसी कारण से न भरे जाने पर बचे हुए पदों पर सेवारत न्यायिक अधिकारियों को भर्ती किया जाएगा। सिंह ने तर्क दिया कि धीरज मोर विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए गए फैसले के अनुसार अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित पद सेवारत अधिकारियों से नहीं भरे जाएं। कर्नाटक व दिल्ली हाईकोर्ट उच्च न्यायिक सेवा की भर्तियों में इस दिशा-निर्देश का परिपालन हो चुका है। उन्होंने तर्क दिया कि सेवारत न्यायिक अधिकारियों के लिए आरक्षित पदों पर वकीलों की भर्ती नहीं होती। ऐसे में वकीलों के कोटे की सीटों पर सेवारत न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति असंवैधानिक हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इस नियम के तहत वकीलों के आरक्षित कोटे में भर्ती किए गए सेवारत न्यायिक अधिकारियों से पद खाली कराए जाएं।

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praveen chaturvedi Desk
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