अब स्तम्भ के बहाने 'गांधीगीरी की तैयारी

उच्च शिक्षा विभाग ने प्राचार्यों को भेजी सूचना

जबलपुर। मप्र के बदले राजनीतिक माहौल के बीच जबलपुर में नई शुरुआत हो रही है। यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलजों में गांधी स्तम्भ की स्थापना के साथ जबलपुर में भी 'गांधीगीरीÓ की तैयारी की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने गांधी स्तम्भ बनाने के लिए कॉलेजों के प्राचार्यों को आवश्यक कदम उठाने कहा है। दूसरी ओर इस निर्णय को लेकर कॉलेजों में असमंजस की स्थिति बनी है। स्तंभ के निर्माण में लाखों रुपए खर्च होंगे और उन्हें अपने खर्चे पर यह सब करना होगा। कई कॉलेजों में इसके लिए पर्याप्त बजट नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग ने जनभागीदारी से पैसा निकालने का विकल्प दिया है। महाविद्यालय जनभागीदारी मद के अंतर्गत सेल्फ फाइनेंस कोर्स से होने वाली आय से इसको तैयार कर सकते हैं। स्तंभ निर्माण में ही करीब 2 लाख से 3 लाख रुपए तक खर्च होंगे। इसमें गांधी की प्रतिमा के साथ स्तंभ, जगह का चयन, नेम प्लेट और उसमें गांधी की विचाराधाराओं, आंदोलन को रेखांकित करना होगा।

यदि किसी कॉलेज में जनभागीदारी मद में खर्च के लिए पैसा नहीं है तो उसे इसका सबूत देना होगा। जनभागीदारी मद के विगत तीन वर्षों के आय-व्यय की संपूर्ण जानकारी आयुक्त उच्च शिक्षा को भेजनी होगी। अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. लीला भलावी ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है। सभी कॉलेज प्राचार्यों को इससे अवगत कराया गया है। कॉलेजों से इस सम्बंध में रिपोर्ट मांगी गई है। इस तैयारी को लेकर जबलपुर शहर में बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा ने इसे राजनीतिक फायदे वाला कदम बताया है। जबकि, कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश सरकार शैक्षणिक कैलेंडर के हिसाब से तैयारी करा रही है। इसमें किसी तरह के राजनीतिक बहस को बढ़ाया नहीं दिया जाना चाहिए।

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shyam bihari Desk
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