बेनूर होता जा रहा है ऐतिहासिक संग्राहलय, क्योंकि मूर्तियां वापस नहीं लौटीं

बेनूर होता जा रहा है ऐतिहासिक संग्राहलय, क्योंकि मूर्तियां वापस नहीं लौटीं

Shyam Bihari Singh | Publish: May, 18 2019 08:00:00 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

जबलपुर में पर्यटकों की संख्या हो रही कम, भोपाल में मिलते हैं पुराने अभिलेख

जबलपुर। शहर के रानी दुर्गावती राज्य पुरातत्व संग्राहलय से अन्य संग्रहालयों में मूर्तियों के भेजे जाने का सिलसिला जारी है। इस कारण कल्चुरी कालीन महत्वपूर्ण अनेक मूर्तियां कम हो रही है। पिछले तीन वर्ष से विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी आ रही है। स्थिति यह है कि संग्रहालय में पहुंचने वाले रिसर्च स्कॉलर भी मायूस होने लगे हैं।
जानकारों के अनुसार संग्रहालय कल्चुरी काल का प्रतिनिधित्व करता है। कला, संस्कृति और ऐतिहासिकता की समृद्ध विरासत में मूर्तिंयां, शिलालेख कम होने से आकर्षण कम होता गया। जबकि, राज्य संग्रहालय के 16 जिले के पूर्वी क्षेत्र स्थित रीवा के अभिलेखागार को बंद करने के बाद भोपाल में केंद्रीय अभिलेखागार बना दिया है। जबलपुर से जुड़े आजादी के पहले के अखिलेखों के अध्ययन या रिसर्च के लिए भोपाल जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। वर्षों से मूर्तियां कम होने के साथ 2015 से विदेशी भाषा में दक्ष गाइड का पद रिक्त है, दर्शकों को लुभाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। दर्शक दीर्घा में अब महज 450 प्रतिमाएं हैं।
नागपुर और रायपुर में हैं धरोहर
मप्र को राज्य बनने से पहले नागपुर में राजधानी हुआ करती थी। उस समय नागपुर के संग्रहालय में जबलपुर के तेवर, कटनी के बडग़ांव, कारी तलाई, दमोह के दानी की पुरातात्विक मूर्तियां व शिलालेख रखे गए। 8 से 11वीं सदी की कल्चुरी कालानी और 12 से 16 वीं सदी की मूर्तियां वहां भेजी गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश का गठन हुआ तो मूर्तियां वापस नहीं मंगाई गई। डेढ़ दशक पहले पुरातत्व विभाग ने मूर्तियां मंगाने के लिए पत्राचार किया लेकिन महाराष्ट्र ने वापस नहीं किया। इसी प्रकार अविभाजित के रायपुर में केंद्रीय संग्रहालय के लिए जबलपुर की मूर्तिंया भेजी गई थीं, छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद महाकौशल क्षेत्र की धरोहरों को वापस मंगाने के प्रयास ही नहीं हुए।
उज्जैन कुम्भ से वापस नहीं आई मूर्तियां
उज्जैन कुम्भ में बनाए गए संग्रहालय के लिए जबलपुर में चयनित कई विशेष श्रेणी की 11 मूर्तियां भेजी गई, जो अब तक वापस नहीं आई। इसके लिए पत्राचार हुए पर परिणाम नाकाफी रहे।

जबलपुर की पुरातात्विक महत्व की जो मुर्तियां उज्जैन या दूसरे स्थानों पर हैं, उसे मंगाने के प्रयास किए जाएंगे।
पीसी महोबिया, प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर

जबलपुर की मूर्तियां व अभिलेखों को वापस मंगाने के लिए संघ की बैठक में प्रस्ताव रखूंगा। इसके लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
राजकुमार गुप्ता, सदस्य जिला पुरातत्व संघ

संग्रहालय में मूर्तियां कम होने से डाटा क्लेक्शन में प्राब्लम आती हैं। रिसर्च में भी मुश्किलें आती हैं।
श्वेता सिंह अहिरवार रिसर्च स्कॉलर

दर्शकों की स्थिति
वर्ष- भारतीय - विदेशी
2019- 2290- 11
2018- 7265- 28
2017- 5523- 61

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