scriptholy narmada gets dirty with Sewer water, narmada ashtak, narmada aart | नर्मदे हर: नर्मदा में खुलेआम मिल रहा नाला, उसी से कर रहे आचमन | Patrika News

नर्मदे हर: नर्मदा में खुलेआम मिल रहा नाला, उसी से कर रहे आचमन

गंदे नालों के मुहानों को सीधे नर्मदा में मिलने से नहीं रोक पा रहा प्रशासन
जुबां पे नर्मदे हर-तटों पर आचमन, फिर भी रोजाना 165 मिलियन लीटर मिल रही गंदगी

 

जबलपुर

Published: March 05, 2022 08:46:59 am

श्याम बिहारी सिंह जबलपुर। पावन-पुण्य-मोक्षदायिनी, कलकल करती नर्मदा नदी के किनारे बसे जबलपुर को ‘प्रकृति का खजाना’ मिला है। यहां के अधिकतर लोगों की जुबां पर नर्मदे हर होता है। तटों पर सुबह से लेकर आधी रात तक नर्मदा जल का आचमन करने वालों की भीड़ रहती है। रहवासी नर्मदा के खूबसूरत आंचल में समय बिताने को सुकूनभरा मानते हैं। इसके बाद भी चिंताजनक तथ्य यह है कि जबलपुर से ही मां नर्मदा का पानी सबसे ज्यादा प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कुछ समय पहले की रिपोर्ट को सही मानें, तो जबलपुर से 135 मिलियन लीटर गंदगी नालों के जरिए सीधे नर्मदा में मिल रही है। इतना गंदा पानी मप्र में किसी भी और शहर से नर्मदा में नहीं मिलता।

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holy narmada

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि अमरकंटक से लेकर मध्यप्रदेश की सीमा में रोजाना करीब 165 मिलियन लीटर सीवेज की गंदगी मिल रही है। चौंकाने वाली बात है कि 135 मिलियन लीटर गंदगी सिर्फ जबलपुर से ही मिलती है। नर्मदा में गंदे नाले मिलने से रोकने के प्रशासनिक दावे लम्बे समय से किए जा रहे हैं। लेकिन, असल में कोई प्रयास नजर नहीं आता। नगर निगम बीते 10 साल से कह रहा है कि नालों का पानी सीधे नर्मदा में नहीं मिलने दिया जाएगा। लेकिन, ग्वारीघाट के साथ आसपास की बस्तियों से निकलने वाला सीवेज का हजारों लीटर पानी बिना ट्रीटमेंट के नर्मदा में मिल रहा है। उधर, ओमती, मोतीनाला और करौंदा नाला से होते हुए गंदा पानी परियट नदी, फिर हिरन और नर्मदा में मिलता है। गौर-परियट की सैकड़ों डेयरियों की गंदगी गौर नदी से होते हुए नर्मदा में मिलती है।

The beauty of Narmada beache deteriorated due to administrative negligence
IMAGE CREDIT: patrika

गुणवत्ता जांचने की कोशिश की सुस्त चाल-मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नर्मदा नदी में प्रदूषण का स्तर जांचने का दावा कुछ समय पहले किया था। कहा गया था कि प्रदूषण की स्थिति को घाट पर लगे डिस्प्ले बोर्ड में दिखाया जाएगा। विशेष मापक से हर सेकेंड पानी की गुणवत्ता जांची जाएगी। यह भी कहा गया कि मोबाइल में प्रदूषण बोर्ड के ऐप, बोर्ड की बेवसाइट पर भी रियल टाइम डाटा देखा जा सकता है। नर्मदा नदी में प्रदूषण की जांच के लिए अभी मैन्युवल तरीके से नमूने जुटाए जाते हैं। हर माह अलग-अलग तटों से पानी लेकर जांच की जाती है। लम्बी प्रक्रिय होने के चलते प्रदूषण के स्तर का सही मापन नहीं हो पाता। जानकारों का कहना है प्रदूषण स्तर मापने का हाइटेक तरीका कारगार हो सकता है। तटों पर डिस्प्ले बोर्ड लगने से जागरुकता भी आ सकती है।

कार्रवाई और जागरुकता जरूरी
नर्मदा में गंदे नालों का पानी सीधे मिलने से रोकना निगम के अफसरों की जिम्मेदारी है। वे चाहें, तो ट्रीटमेंट करना बड़ा काम नहीं है। लेकिन, अफसरों की अनदेखी के चलते वर्षों से नर्मदा मैली हो रही हैं। नर्मदा की स्वच्छता के लिए लम्बे समय से जमीनी स्तर पर काम करने वाले ग्वारीघाट के पुरोहित अभिषेक मिश्रा का कहना है कि अनदेखी हर तरफ से हो रही है। अफसरों की नाकामी ङ्क्षचताजनक है। नाले तो नर्मदा को प्रदूषित कर ही रहे हैं, आम लोग भी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। सबको पता है कि तटों पर पन्नियां बिक रही हैं। लोग साबुन, शैम्पू से नर्मदा में नहाते हैं। प्रशासन को चाहिए कि तटों पर उन चीजों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाए, जिससे नर्मदा जल को नुकसान पहुंचता है। पक्षियों को दाना या नमकीन खिलाने वाले लोग पाउच और पन्नियों को नर्मदा में ही फेंक देते हैं। आस्था पर लापरवाही भारी पड़ रही है। नर्मदा जल का आचमन मात्र ही पुण्यलाभ दिलाता है। ऐसे में नर्मदा जल प्रदूषित करने का कारण लोग आखिर क्यों बनते हैं?

रियल टाइम प्रदूषण जानने के लिए मॉनीटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए ग्वारीघाट में जगह चिन्हित कर ली गई है। टेंडर भी हो गए हैं। सम्भवत: तीन से चार महीने में यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
- डॉ. आलोक जैन, क्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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