ऐसा कोविड सेंटर किस काम का? जहां मरीजों की चीख किसी को सुनाई नहीं देती

जबलपुर में कोरोना संक्रमित की बेचैनी को हल्के में लिया अस्पताल प्रशासन ने, पहले की घटनाओं को भी किया नजरअंदाज!

 

By: shyam bihari

Published: 05 Sep 2020, 08:56 PM IST

जबलपुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जबलपुर का कोविड केयर सेंटर संक्रमितों के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण जगह है। लेकिन, यहां की व्यवस्थाएं चौपट हैं। डॉक्टर, नर्स, स्टाफ की जितनी शिकायतें बाहर आ रही हैं, उससे तो यही लगता है कि यहां कोई सिस्टम काम ही नहीं करता। अस्पताल प्रबंधन कहने को लाख दावा करता है। लेकिन, असल बात यही है यहां भर्ती होने वाले ज्यादातर मरीज खून के आंसू रोते हैं। वृद्धों को घिसट-घिसटकर टॉयलेट जाना पड़ता है। वहां से निकलने की हिम्मत उनके पास नहीं रहती। कुछ तो वहीं देर तक पड़े रहते हैं। अचानक काई दूसरा मरीज वार्ड ब्वॉय को गिड़गिड़ाकर टॉयलेट भेजता है। वहां से मरीजों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें दीवारें से टकराकर वापस हो जाती हैं। स्वाभाविक सी बात है, जब अस्पताल 'भूतबंगलाÓ बन जाएगा, तो वहां बेचैनी होगी। अपनों की याद आएगी। एक-एक दिन बिताना मुश्किल हो जाएगा। इससे भी बड़ी बात यह है कि जिम्मेदारों ने कोरोना संक्रमितों में भरोसा जगाने की कोशिश कभी नहीं की। उन्हें सकारात्मकता विकसित करने के बारे में प्रयास नहीं किया। वहां भर्ती होने के बाद शायद मरीज को महसूस होता है कि उससे बहुत बड़ा अपराध हो गया। यह सही है कि महामारी से निपटने में प्रशासन कसर नहीं छोड़ रहा है। लेकिन, उसके दायरे में सबसे पहले संक्रमित होने चाहिए। कोविड सेंटर में दो लोग इसके पहले भी जाने देने की कोशिश कर चुके थे। यह सवाल जिम्मेदारों से पूछा जाना चाहिए कि उन घटनाओं को गम्भीरता से क्यों नहीं लिया गया? अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन कुछ करे या न करे, यह जरूर सोचे कि आखिर यहां भर्ती मरीज बार-बार आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए क्यों सोच रहे हैं?

मेडिकल के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल से कोरोना संक्रमित प्रमोद सोनकर के कूदने को लेकर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि सोनकर करीब पांच दिन से कोविड वार्ड में भर्ती थे। घटना से दस मिनट पहले ही उनकी घर पर फोन से बातचीत हुई थी। इस फोन कॉल के बाद से वे परेशान थे। वे दो दिन से कह रह थे कि वार्ड में नहीं रहना। वे घर जाना चाहते थे। लेकिन, उनकी बात और बेचैनी को किसी ने गम्भीरता से नहीं लिया। उन्होंने राउंड पर आए डॉक्टर से भी पूछा था कि वे कब तक डिस्चार्ज होंगे। यह कहकर टाल दिया गया कि दो-चार दिन में सोचा जाएगा। कोरोना संक्रमित की आत्महत्या की खबर फैलने पर मौके पर परिजन सहित कई लोग एकत्रित हो गए। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा, एएसपी अमित कुमार, एएसपी संजीव उइके, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पीके कसार तुरंत पहुंचे। घटना के बाद तनाव की स्थिति को देखते हुए तिलवारा और गढ़ा थाने का बल भी तैनात किया गया। घटना के बाद कलेक्टर, एसपी ने कोरोना वार्ड में जाकर भर्ती मरीजों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार मरीजों ने साफ-सफाई और अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर शिकायत की। इसके बाद तुरंत मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। उसमें वार्ड में भर्ती मरीजों के तनाव और अकेलेपन को दूर करने के लिए मनोरोग विशेषज्ञों से काउंसिलिंग कराने जरुरत बताई गई। अस्पताल में वार्ड ब्वॉय से मरीजों का लगातार फीडबैक लेने के लिए कहा गया। मरीजों की अन्य समस्याओं के निराकरण को लेकर दिशा-निर्देश दिए।

वेंटीलेशन की जगह से कूदा

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की खिड़कियों में जाली लगाने का काम चल रहा है। सूत्रों के अनुसार जिस मंजिल पर प्रमोद सोनकर भर्ती थे, वहां खिड़कियों में जाली लगाने का काम पूरा हो चुका है। लेकिन, आधुनिक भवनों में लगाए गए बड़े शीशे के बीच वेंटीलेशन के लिए एक खुली खिड़की बनी थी। इसके पास सोनकर टहलते हुए गए। वहां खाली बेड के ऊपर मेज रखकर छलांग लगा दी। कोरोना मरीज की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने मर्ग कायम किया है। गढ़ा सीएसपी रोहित काशवानी जांच करेंगे। इस सनसनीखेज मामले में कोरोना संक्रमित शव का पोस्टमार्टम किया गया है। मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिंक एक्सपर्ट के विशेष पैनल ने पीएम किया। पैनल में तीन विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल है। अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल के अनुसार चौहानी श्मशान घाट में किया गया। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती दो मरीजों ने इससे पहले तीसरी मंजिल से कूदने की कोशिश की थी। दोनों घटनाओं में मेडिकल स्टाफ ने मरीजों को बचा लिया था। दोनों मरीजों ने कोविड वार्ड में अव्यवस्था से नाराजगी जताई थी। डॉक्टरों के बात नहीं सुनने और स्टाफ के देखभाल नहीं करने की पीड़ा बताई थी।

shyam bihari Desk
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