दुश्मन आंख दिखाए तो मूंहतोड़ जवाब देते हैं जवान

दुश्मन आंख दिखाए तो मूंहतोड़ जवाब देते हैं जवान
If the enemy shows the eyes, then the retorted army man

Gyani Prasad | Updated: 28 Feb 2019, 12:33:43 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

शहर तैयार करता है देश के रक्षक, हमेशा रहा है योगदान

जबलपुर. रक्षा उत्पादन के साथ-साथ शहर मातृभूमि की रक्षा के लिए जवानों को तैयार करने का महत्वपूर्ण काम करता है। सेना के संस्थान इस काम को अंजाम देते हैं। चाहे जम्मू एवं कश्मीर रायफल रेजीमेंट सेंटर हो या दि ग्रेनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर में हर साल दो से तीन हजार जवान टे्रनिंग पूरी कर देश की सुरक्षा में तैनात किए जाते हैं। इसलिए जब भी दुश्मन आंख दिखाता है तो जबलपुर और दूसरी जगह पर कड़ी टे्रनिंग लेकर तैयार होने वाले जवान उनको मूंहतोड़ जवाब देते हैं।

जब भी आपात स्थिति बनती है तो रक्षा क्षेत्र में जबलपुर का महत्व बढ़ जाता है। बम-बारूद, तोप और सैन्य वाहन तो यहां की चारों आयुध निर्माणियां उपलब्ध कराई जाती है। तो दूसरी तरफ पैदल सेना में भी शहर का योगदान बढ़ जाता है। यहां से टे्रनिंग करने के उपरांत जवानों को अलग-अलग रेजीमेंट में भेजा जाता है। वहां से उनकी तैनाती अलग-अलग स्थपना पर होती है। जवानों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें।

 ग्रेनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर

सेना के जवानों को छह से आठ महीनें की चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण इस संस्थान में मिलता है। इसे पूरा करने के बाद ही वह थलसेना का हिस्सा बनते हैं। द ग्रेनेडियर्स रेजीमेटल सेंटर (जीआरसी) देश के चुनिंदा प्रशिक्षण केन्द्रों में है। जानकारों का कहना है कि यहा पैदल सेना के रूप में जवानों को दिया जाने वाली टे्रनिंग कई मायनों में अलग है।

जम्मू एवं कश्मीर रायफल्स

जम्मू एंड कश्मीर रायफल्स रेजीमेंट (जैकआरसी) के जवान भी कम नहीं होते। इस सेंटर में भी जवानों को दुर्गम इलाकों में लड़ाई के साथ तोपखाने के साथ किस तरह दुश्मन का डटकर मुकाबला करना है, उसकी जानकारी और प्रशिक्षण मिलता है। उन्हें अलग-अलग प्रकार के हथियारों के साथ घने इलाकों में लडऩे की तरकीब सिखाई जाती है।

वन सिग्नल टे्निंग सेंटर
वन सिग्नल टे्रनिंग सेंटर भी सैनिकों में कम्युनिकेशन स्किल को बढ़ाने में बड़ा मददगार होता है। यहां संचार की उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता है। सैनिकों संचार के साधनों से अवगत कराया जाता है। क्योंकि जिन जगहों पर सेना तैनात होती है, वह दुर्गम एवं सुदूर इलाके हाते हैं। ऐसे में संपर्क में किस तरह रहा जाए, इससे अवगत कराया जाता है।

कॉलेज ऑफ मटैरियल मैनेजमेंट
कॉलेज ऑफ मटैरियल मैनेजमेंट का अलग महत्व है। युद्ध में किसी तरह से सामग्री का प्रबंधन किया जाए। उन्हें सुरक्षित रखने का तौर तरीक सिखाया जाता है। यहां कई प्रकार के डिप्लोमा कोर्स कराए जाते हैं। देश और विदेश के सैनिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। उन्हें नई तकनीक बताई जाती हैं।

सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। जब वह प्रशिक्षण पूरा करता हैं तो उन्हें अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जाता है। आपात स्थिति हो या शांतिकाल सभी परिस्थितियों में काम करने का प्रशिक्षण उसे दिया जाता है।

कर्नल अरुण कुमार, जनसंपर्क अधिकारी हेड क्वार्टर मध्यभारत एरिया

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