इन कोरोना संक्रमितों की मानें तो नर्क है यहां का कोविड सेंटर! बुलाकर थक जाते हैं मरीज, फिर भी नहीं मिलती मदद, घिसट-घिसटकर जाते हैं टॉयलेट

जबलपुर के कोरोना डेडिकेटेड और केयर सेंटर में भर्ती मरीजों की पीड़ा

 

 

By: shyam bihari

Published: 11 Aug 2020, 09:10 PM IST

 

जबलपुर। कोरोना से पीडि़त उम्रदराज मरीजों को जबलपुर के अस्पताल में संक्रमण के साथ ही समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। डॉक्टर-नर्स सहित बाकी सपोर्टिंग स्टाफ सिर्फ राउंड के वक्तकोविड वार्ड में आता है। बाकी समय में मरीज को कुछ जरूरत हुई, तो वे पुकारते-पुकारते थक जाते हैं। एक से डेढ़ घंटे बाद उन्हें मदद मिल पाती है। कोरोना डेडिकेटेड और केयर सेंटर में भर्ती एवं डिस्चार्ज हो चुके ज्यादातर संक्रमितों की पीड़ा है कि स्टाफ अपना काम करने के बाद उस फ्लोर से ही चले जाते हैं। ऐसे में किसी संक्रमित को समस्या बढ़ जाए या फिर गम्भीर संक्रमित को टॉयलेट जाना हो, तो उन्हें स्टाफ के आने का इंतजार करना पड़ता है।
टॉयलेट जाने में गिर पड़े
कोविड वार्ड में भर्ती वृद्ध, दिव्यांग और शारीरिक रूप से कमजोर मरीजों को समस्या ज्यादा हो रही है। सूत्रों के अनुसार मेडिकल के कोविड वार्ड में ज्यादातर वृद्ध और गम्भीर कोरोना संक्रमित भर्ती हैं। उनके साथ परिवार का कोई दूसरा सदस्य भर्ती नहीं है। ऐसे मरीज को चलने-फिरने में समस्या होने पर वार्ड में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार समय पर स्टाफ नहीं आने पर बेड से उतरने की कोशिश में मरीज फर्श पर गिर जाते हैं। घिसटकर टॉयलेट तक जाते हैं। नर्सेस राउंड के दौरान उन्हें दवा देकर चली जाती हैं। लेकिन, वे समय पर खुराक ले रह है कि नहीं, यह सुनिश्चित नहीं किया जा रहा। कुछ गम्भीर मरीजों के अन्य बीमारी की रूटीन दवा की खुराक लेने से भूलने से तबीयत बिगड़ चुकी है। ज्ञानोदय और सुखसागर कोविड केयर सेंटर में भी वार्ड में स्टाफ नहीं होने से भर्ती मरीजों को समय पर मदद नहीं मिल रही है। संक्रमितों के परिजन के अनुसार उस फ्लोर में वार्ड ब्वॉय तक नहीं होने से मरीज के दर्द का स्टाफ को तब पता चलता है, जब कोई दूसरा फोन करके शिकायत करता है। ऐसे दो मामलों में परिजनों ने संक्रमित की मौत के बाद व्यवस्था पर सवाल भी उठा चुके हैं।
पीपीई किट की समस्या
कोविड से लड़ाई में पीपीई किट को लेकर समस्या बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार स्टाफ को एक बार में एक ही किट इश्यू होती है। गर्मी के कारण किट पहनने के कुछ देर में ही स्टाफ पसीना-पसीना हो जाता है। किट पहनकर वे ज्यादा देर तक वार्ड में काम नहीं कर पा रहे। मरीजों का कहना है कि कोविड वार्ड में बाकी व्यवस्थाएं ठीक हैं। डॉक्टर और नर्सेस अपने राउंड में समय पर आ रहे हैं। सफाई भी दिन में दो बार हो रही है। लेकिन पहली बार की सफाई ही दिन में 11 बजे के बाद हो रही है। इस कारण सुबह के समय गंदगी बनी रहती है। मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के अनुसार कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों को बेहतर सुविधा देने के प्रयास कर रहे हैं। उनकी समस्या दूर की जा रही है। कोविड वार्ड में माइक लगाया जाएगा। ताकि कोई भी जरूरत हो एनाउंसमेंट कर सकें। वार्ड में अंदर भी एक स्टाफ रहेगा।

shyam bihari Desk
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