आयकर : टैक्स की गणना में फंसा ये पेंच, उलझन में आयकरदाता

सरकार ने बजट में किया है आयकर में विकल्प चुनने का प्रावधान

 

By: reetesh pyasi

Published: 18 Feb 2020, 06:46 PM IST

जबलपुर। आयकर को लेकर बजट में किए गए नए प्रावधानों को लेकर करदाताओं ने प्लानिंग शुरू कर दी है। विशेषज्ञों के साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं कर सलाहकारों से जानकारी जुटाई जा रही है कि उनके लिए पुराना या नया टैक्स स्लैब ठीक रहेगा। मार्च में एडवांस टैक्स की चौथी किस्त देनी है। ऐसे में नए वित्तीय वर्ष के लिए कौन से टैक्स सिस्टम का इसका हिसाब-किताब तेज हो गया है। क्योंकि टैक्स की पुरानी व्यवस्था में छूट का प्रावधान है। वहीं नए स्लैब में ऐसा नहीं है। जबलपुर आयकर आयुक्त कार्यालय के अंतर्गत करीब 7 लाख 53 हजार करदाता हैं। इन करदाताओं से करीब 46 सौ करोड़ रुपए का राजस्व आयकर के रूप में हासिल होता है। अकेले जबलपुर में सवा लाख से ज्यादा करदाताा हैं। इनमें अधिकतर नौकरीपेशा हैं। व्यापारी और उद्योगपति भी हैं। इनमें कई करदाता टैक्स की बचत के लिए छूट का लाभ लेते हैं, तो कई इस दायरे में नहीं आते या फिर वह छूट के लिए दावा नहीं करते।

नौकरीपेशा व पेंशनर्स वर्ग को ज्यादा फायदा
फाइनेंस बिल की जानकारी जैसे-जैसे विस्तृत रूप में आ रही है, वैसे ही आयकरदाताओं भी वैकल्पिक कर व्यवस्था पर ध्यान देने लगे हैं। कर क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जिस करदाता की बिजनेस इनकम नहीं है, वहीं नई से पुरानी या पुरानी से नई व्यवस्था को चुन सकता है। सीए अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिन करदाताओं की बिजनेस इनकम है, वे हर साल अपना विकल्प नहीं बदल सकेंगे। उन्होंने एक बार जो विकल्प चुन लिया, हमेशा उसी के अनुरूप चलना पडेग़ा। उनका कहना था कि बिजनेस इनकम वाला व्यक्ति यदि एक बार नए सिस्टम को चुन लेता है और फिर उसे पुराने में वापिसी करनी है तो वह ऐसा केवल एक बार कर सकता है। अगली बार उसे पुराने सिस्टम में बने रहना होगा।

पुराना या नया विकल्प फायदेमंद
वैसे आयकर के दोनों विकल्पों की अपनी विशेषताएं हैं। पुराना स्लैब छूट लेने वाले करदाताओं के लिए बेहतर है। जिन्हें छूट का लाभ नहीं लेना उनके लिए नया विकल्प ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है। जानकारों ने बताया कि मान लें कि किसी व्यक्ति की आय 10 लाख रुपए है। यदि उसने होमलोन ले रखा है। वहीं एनपीएस या धारा 80 सी की छूट वाली योजनाओं में निवेश कर रखा है, तो दोनों को मिलाकर चार लाख की छूट मिल जाएगी। मेडिक्लेम के तहत 50 हजार रुपए की अतिरिक्त छूट के बाद कर योग्य आय 5 लाख 50 हजार रह जाती है। इस प्रकार उसे करीब 22 हजार 500 रुपए टैक्स देना होगा। बिना छूट वाले नए स्लैब में यह टैक्स करीब 75 हजार रुपए होगा। दूसरी तरफ पुराने स्लैब में कोई करदाता किसी प्रकार की छूट नहीं लेता है, तो उसे सालाना 10 लाख की आय पर लगभग 1 लाख 12 हजार 500 रुपए टैक्स चुकाना पड़ रहा है।

reetesh pyasi Desk
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